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सुप्रीम कोर्ट ने Atibir Industries और SBI-ARC का कर्ज विवाद 375 करोड़ रुपये पर निपटाया

सुप्रीम कोर्ट ने 26 अक्टूबर 2026 को Atibir Industries को निर्देश दिया कि वह पहले चुकाए 250 करोड़ रुपये के अलावा 125 करोड़ रुपये और एक एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी को दे, जिसे SBI ने कर्ज सौंपा था।

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आधिकारिक स्रोतSupreme Court of India
कानूनी / 26 अक्टूबर 2026

सुप्रीम कोर्ट ने 26 अक्टूबर 2026 को स्पंज आयरन और पिग आयरन बनाने वाली कंपनी Atibir Industries Co. Ltd. को निर्देश दिया कि वह 12 हफ्तों के भीतर एक एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी (ARC) को 125 करोड़ रुपये चुकाए। कोर्ट ने कहा कि कंपनी पहले ही 250 करोड़ रुपये दे चुकी है, और यह अतिरिक्त राशि उस कर्ज का पूर्ण और अंतिम निपटारा होगी जिसे State Bank of India ने मार्च 2023 में इस ARC को सौंपा था।

क्या हुआ

कंपनी ने SBI के नेतृत्व वाले बैंकों के समूह से कर्ज लिया था। फैसले के अनुसार, SBI ने 16 अक्टूबर 2020 से उसके खाते को NPA (डिफॉल्ट वाला कर्ज) घोषित किया और मार्च 2023 में यह कर्ज 250 करोड़ रुपये में ARC को सौंप दिया। कंपनी ने इस वर्गीकरण को चुनौती दी और कहा कि इसमें RBI के COVID-19 मोरेटोरियम सर्कुलरों की अनदेखी हुई। कलकत्ता हाई कोर्ट के एकल न्यायाधीश ने वर्गीकरण और कर्ज सौंपने को रद्द कर दिया था, लेकिन डिवीजन बेंच ने 25 जुलाई 2024 को वह फैसला पलट दिया।

अपील के दौरान कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत 250 करोड़ रुपये चुकाए। कोर्ट द्वारा नियुक्त एक पूर्व न्यायाधीश ने सालाना 13% से 15% रिटर्न का सुझाव दिया था। कोर्ट ने 15% सालाना की सबसे ऊंची दर, बीते समय और खर्चों को ध्यान में रखकर 125 करोड़ रुपये और तय किए। कोर्ट ने कहा कि वह यह तय नहीं कर रहा कि NPA वर्गीकरण या कर्ज सौंपना वैध था या नहीं; ये सवाल खुले छोड़े गए हैं।

इसका क्या मतलब है

रकम मिलने के चार हफ्तों के भीतर कर्जदाता पक्ष को टाइटल डीड लौटानी होंगी और बाकी सभी सिक्योरिटी और गारंटी छोड़नी होंगी। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल, कोलकाता में दिवालिया याचिका और डेट्स रिकवरी ट्रिब्यूनल-I, कोलकाता में वसूली का मामला निपटा हुआ माना जाएगा।

कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर कंपनी 12 हफ्तों की समय सीमा चूकती है, तो कर्जदाता अपनी कार्यवाही फिर शुरू कर सकेंगे और कंपनी को इस फैसले का लाभ नहीं मिलेगा। कोर्ट ने कहा कि यह आदेश मामले के विशेष तथ्यों में, न्याय और समानता के आधार पर दिया गया, आंशिक रूप से इसलिए कि कंपनी चालू है और उसके कर्मचारियों की रोजी-रोटी दांव पर थी। यह इस पर फैसला नहीं है कि बैंक कर्जों का वर्गीकरण कैसे करें।

स्रोत: Supreme Court judgment

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।