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कानूनी

सुप्रीम कोर्ट ने चीनी मिल की आय में बकाया एक्साइज ड्यूटी जोड़ने का आदेश रद्द किया

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आयकर अधिकारी एक चीनी मिल की आय में 69.92 लाख रुपये की बकाया एक्साइज ड्यूटी नहीं जोड़ सकते थे, क्योंकि कंपनी ने इसे कभी खर्च के रूप में दावा ही नहीं किया था।

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आधिकारिक स्रोतSupreme Court of India
कानूनी / 27 अक्टूबर 2026

सुप्रीम कोर्ट ने 27 अक्टूबर 2026 को 69.92 लाख रुपये की बकाया एक्साइज ड्यूटी से जुड़े आयकर विवाद में Lakshmi Sugar Mills Co. Ltd. के पक्ष में फैसला दिया। कोर्ट ने हाई कोर्ट का वह आदेश रद्द कर दिया, जिसमें आयकर विभाग को यह रकम कंपनी की आकलन वर्ष 2005-06 की कर योग्य आय में जोड़ने की अनुमति मिली थी।

क्या हुआ

कंपनी चीनी बनाती है और साथ में शीरा (मोलैसेस) भी बनता है। उसके टैक्स ऑडिटर की रिपोर्ट में क्लोजिंग स्टॉक पर 69.92 लाख रुपये की एक्साइज ड्यूटी बकाया दिखाई गई थी। 2007 में आकलन अधिकारी ने यह रकम आयकर अधिनियम, 1961 की Section 43B और Section 145A के तहत कंपनी की आय में जोड़ दी। Section 43B के तहत कुछ वैधानिक बकाया की कटौती तभी मिलती है जब उनका वास्तव में भुगतान हो जाए।

कंपनी का कहना था कि उसने यह ड्यूटी अपने लाभ-हानि खाते में कभी डाली ही नहीं, इसलिए कोई कटौती नहीं मांगी। उसने यह भी कहा कि स्टॉक बॉन्डेड वेयरहाउस में ही था, और एक्साइज कानून के तहत ड्यूटी माल बाहर निकालने पर ही देय होती है। आयकर आयुक्त (अपील) और आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण ने कंपनी की बात मानी और यह जोड़ हटा दिया। हाई कोर्ट ने यह मानकर उनके आदेश पलट दिए कि माल बाहर निकाला जा चुका था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह आधार रिकॉर्ड के विपरीत था, क्योंकि निचले प्राधिकरणों ने पाया था कि स्टॉक बॉन्डेड वेयरहाउस में ही रहा। कोर्ट ने कहा कि जिस रकम का करदाता ने कभी दावा ही नहीं किया, उसे नामंजूर करना कानून के तहत अनुचित है, और विभाग यह नहीं दिखा सका कि कंपनी ने अपनी किताबों में इसका दावा कहां किया। कोर्ट ने अपील मंजूर कर ली।

इसका क्या मतलब है

यह फैसला पुष्टि करता है कि केवल टैक्स ऑडिट रिपोर्ट की टिप्पणी के आधार पर किसी रकम को आय में नहीं जोड़ा जा सकता। विभाग को दिखाना होगा कि खातों में उस प्रविष्टि का दावा कैसे किया गया और उससे कर योग्य आय कैसे घटी।

कोर्ट ने Section 43B के काम करने का तरीका भी दोहराया। 31 मार्च के बाद लेकिन रिटर्न की नियत तारीख से पहले चुकाया गया वैधानिक बकाया उसी वित्त वर्ष के लिए दावा किया जा सकता है। अगर तब तक भुगतान न हो, तो इसे खर्च के रूप में नहीं दिखाया जा सकता। कोर्ट ने इस फैसले को नॉन-रिपोर्टेबल चिह्नित किया है।

स्रोत: Supreme Court judgment

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।