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सुप्रीम कोर्ट ने GST विभाग की देर से दाखिल अपील खारिज की, IBC अपील की समय सीमा तय

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि NCLAT के दिवाला आदेश के खिलाफ अपील की 60 दिन की सीमा आदेश सुनाए जाने से शुरू होती है, और Samyu Glass मामले में केंद्रीय GST विभाग की अपील खारिज कर दी।

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आधिकारिक स्रोतSupreme Court of India
कानूनी / 25 अक्टूबर 2026

सुप्रीम कोर्ट ने 14 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय GST विभाग की एक अपील को देर से दाखिल होने के कारण खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि किसी दिवाला आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की समय सीमा उसी दिन से शुरू होती है जब नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) आदेश सुनाता है, न कि तब से जब कोई पक्ष प्रमाणित प्रति लेता है। इस फैसले से Samyu Glass Private Limited की वह समाधान योजना बरकरार रहती है, जिसमें विभाग के उत्पाद शुल्क बकाये के लिए 1,34,657 रुपये रखे गए थे।

क्या हुआ

फैसले के अनुसार, कांच के कंटेनर बनाने वाली Samyu Glass के खिलाफ 2013 से 2017 के बीच उत्पाद शुल्क वसूली की कई कार्यवाहियां हुईं और कंपनी ने 2016 के अंत के आसपास उत्पादन बंद कर दिया। Andhra Bank, जो अब Union Bank of India है, कंपनी को दिवाला प्रक्रिया में ले गया। नवंबर 2019 में कर विभाग ने 22,60,32,948 रुपये का दावा दाखिल किया।

13 अगस्त 2021 को हैदराबाद स्थित नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने एक समाधान योजना मंजूर की, जिसमें उत्पाद शुल्क बकाये के लिए 1,34,657 रुपये रखे गए। विभाग ने योजना को चुनौती दी, लेकिन चेन्नई स्थित NCLAT ने 2 अगस्त 2023 को उसे बरकरार रखा। विभाग ने 6 सितंबर 2023 को प्रमाणित प्रति के लिए आवेदन किया, 11 अक्टूबर 2023 को प्रति मिली और 21 नवंबर 2023 को अपील दाखिल की।

अदालत ने कहा कि इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड की Section 62 के तहत अपील 45 दिन के भीतर दाखिल करनी होती है, और पर्याप्त कारण होने पर 15 दिन और मिल सकते हैं, यानी अधिकतम सीमा 60 दिन है। अदालत ने कहा कि समय आदेश सुनाए जाने के दिन से गिना जाता है, और केवल वह समय छोड़ा जाता है जो आवेदन के बाद रजिस्ट्री को प्रति तैयार करने में लगता है। आवेदन से पहले के 35 दिन और प्रति मिलने के बाद के 41 दिन जोड़कर अदालत ने पाया कि कुल 76 दिन लगे, जो अधिकतम सीमा से 16 दिन ज्यादा है, और कहा कि उसके पास इस देरी को माफ करने का अधिकार नहीं है।

इसका क्या मतलब है

यह फैसला NCLAT के दिवाला आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने वाले हर पक्ष, जैसे लेनदार, घर खरीदार, कर अधिकारी और प्रमोटर, के लिए सख्त समय सीमा तय करता है। अदालत के अनुसार, प्रमाणित प्रति लेने का इंतजार करने से समय नहीं रुकता, और प्रति तैयार होने का समय छोड़कर 60 दिन के बाद दाखिल अपील पर सुनवाई नहीं हो सकती।

स्रोत: Supreme Court order

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