कानूनी
सुप्रीम कोर्ट: सहकारी बैंक का सदस्य RTI से ठेके का अनुबंध और बैठक के मिनट्स पा सकता है
सुप्रीम कोर्ट ने 26 अक्टूबर 2026 को कहा कि केरल के एक सहकारी बैंक का सदस्य रजिस्ट्रार के माध्यम से RTI Act के तहत बैंक का भवन निर्माण अनुबंध और आम सभा के मिनट्स पा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने 26 अक्टूबर 2026 को कहा कि केरल के एक सहकारी बैंक का सदस्य सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI Act) के तहत रजिस्ट्रार ऑफ को-ऑपरेटिव सोसाइटीज़ के माध्यम से बैंक के निर्माण अनुबंध और उसकी पिछली आम सभा की बैठक के मिनट्स की प्रतियां पाने का हकदार है। कोर्ट ने The Muppathadam Service Co-operative Bank Ltd. की अपीलें खारिज कर दीं और दो हफ्ते के भीतर दस्तावेज़ देने का निर्देश दिया।
क्या हुआ
फैसले के अनुसार, बैंक के एक सदस्य ने जॉइंट रजिस्ट्रार (जनरल) ऑफ को-ऑपरेटिव सोसाइटीज़ को RTI आवेदन देकर दो दस्तावेज़ मांगे थे: बैंक और एक लेबर को-ऑपरेटिव सोसाइटी के बीच हुआ अनुबंध, जिसे एक भवन बनाने का ठेका मिला था, और पिछली आम सभा की बैठक के मिनट्स। दूसरे दौर में राज्य सूचना आयुक्त, एकल न्यायाधीश और केरल हाई कोर्ट की डिवीज़न बेंच ने दस्तावेज़ पाने के उसके अधिकार को सही ठहराया था।
बैंक की दलील थी कि वह RTI Act के तहत "पब्लिक अथॉरिटी" नहीं है और केरल को-ऑपरेटिव सोसाइटीज़ एक्ट, 1969 के तहत रजिस्ट्रार उसके रिकॉर्ड तभी देख सकता है जब वह जांच शुरू करने का फैसला कर ले। कोर्ट ने यह दलील नहीं मानी। कोर्ट ने कहा कि RTI Act की Section 2(f) में "सूचना" में किसी निजी संस्था की वह सामग्री भी शामिल है जिसे कोई पब्लिक अथॉरिटी किसी दूसरे कानून के तहत हासिल कर सकती है, और राज्य कानून की Section 65 और 66 के तहत रजिस्ट्रार का दस्तावेज़ देखने का अधिकार पहले से चल रही जांच पर निर्भर नहीं है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि ये दस्तावेज़ Section 8(1)(d) के तहत छूट में नहीं आते, क्योंकि बोली पूरी हो चुकी थी और ठेका दिया जा चुका था, और न ही Section 8(1)(j) के तहत निजी जानकारी हैं, क्योंकि इन्हें एक सदस्य ने मांगा था।
इसका क्या मतलब है
इस फैसले का मतलब है कि अगर रजिस्ट्रार कानून के तहत ऐसे दस्तावेज़ हासिल कर सकता है, तो किसी सहकारी समिति या सहकारी बैंक के सदस्य को ये दस्तावेज़ इस आधार पर देने से मना नहीं किया जा सकता कि वे समिति के निजी हैं या उनका किसी सार्वजनिक गतिविधि से संबंध नहीं है। कोर्ट ने कहा कि अगर समिति से असंबंधित कोई तीसरा व्यक्ति ऐसा ही अनुरोध करे तो स्थिति अलग होगी। अब जॉइंट रजिस्ट्रार को दोनों दस्तावेज़ मंगाकर दो हफ्ते के भीतर सदस्य को देने होंगे।
स्रोत: Supreme Court judgment
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