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SEBI ने REIT को GIFT City में विदेशी निवेशकों के लिए डिपॉज़िटरी रिसीट जारी करने की अनुमति दी

SEBI ने तुरंत लागू फ्रेमवर्क जारी किया है, जिसके तहत REIT अपनी यूनिट पर डिपॉज़िटरी रिसीट जारी कर सकेंगे, जो केवल GIFT City के अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंजों पर लिस्ट होंगी और केवल अनिवासी निवेशकों के लिए होंगी।

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आधिकारिक स्रोतSecurities and Exchange Board of India
बाज़ार / 2 नवंबर 2026

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने एक फ्रेमवर्क जारी किया है, जिससे रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REIT) GIFT City में लिस्ट होने वाली डिपॉज़िटरी रिसीट के ज़रिये अपनी यूनिट विदेशी निवेशकों को दे सकेंगे। 2 नवंबर 2026 का यह सर्कुलर तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है।

क्या हुआ

REIT निवेशकों से पैसा जुटाकर ऑफिस पार्क जैसी किराया देने वाली संपत्तियां रखता है, और इसकी यूनिट स्टॉक एक्सचेंज पर खरीदी-बेची जाती हैं। डिपॉज़िटरी रिसीट एक विदेशी मुद्रा वाला इंस्ट्रूमेंट है, जिसे कोई विदेशी डिपॉज़िटरी भारत में घरेलू कस्टोडियन के पास रखी यूनिट के बदले जारी करती है।

सर्कुलर के तहत, कोई REIT नई यूनिट जारी करके, या मौजूदा यूनिटधारक अपनी यूनिट ट्रांसफर करके, डिपॉज़िटरी रिसीट केवल भारत के इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज़ सेंटर (IFSC) में ही जारी करवा सकते हैं। ये रिसीट इंडिया इंटरनेशनल एक्सचेंज या NSE इंटरनेशनल एक्सचेंज पर लिस्ट होनी चाहिए। इन रिसीट का धारक, उसके असली मालिक (बेनिफिशियल ओनर) समेत, भारत का निवासी नहीं हो सकता।

REIT तभी पात्र होगा जब वह SEBI के REIT नियमों का पालन करता हो, और REIT, उससे जुड़े पक्ष तथा यूनिट ट्रांसफर करने वाले यूनिटधारक SEBI द्वारा कैपिटल मार्केट से प्रतिबंधित न हों और विलफुल डिफॉल्टर न हों। हर नए इश्यू के लिए यूनिटधारकों की पहले से मंज़ूरी चाहिए, जिसमें डाले गए वोटों में कम से कम 75% पक्ष में हों। जब मौजूदा यूनिटधारकों की यूनिट इस्तेमाल हों, तो REIT को सभी यूनिटधारकों को इसमें हिस्सा लेने का मौका देना होगा।

डिपॉज़िटरी रिसीट के लिए यूनिट उस कीमत से कम पर जारी या ट्रांसफर नहीं की जा सकतीं जो उसी तरह के इश्यू में घरेलू निवेशकों पर लागू होती है। रिसीट के लिए रखी यूनिट नॉन-पब्लिक होल्डिंग मानी जाएंगी। REIT विदेशी एक्सचेंज पर जो भी जानकारी देगा, वह 24 घंटे के भीतर भारतीय स्टॉक एक्सचेंज पर भी दाखिल करनी होगी। SEBI ने कहा कि वह ऑफर दस्तावेज़ पर अपनी टिप्पणी 7 कार्य दिवसों में एक्सचेंज को भेजने की कोशिश करेगा, और एक्सचेंज 15 कार्य दिवसों में मंज़ूरी पर फैसला करेगा।

इसका क्या मतलब है

भारत में मौजूदा REIT यूनिटधारकों के लिए सबसे अहम सुरक्षा हर नए इश्यू पर 75% मंज़ूरी वाला वोट और यह नियम है कि विदेशी खरीदारों को घरेलू निवेशकों से सस्ती यूनिट नहीं मिल सकतीं। भारत के निवासी ये डिपॉज़िटरी रिसीट नहीं रख सकते। 24 घंटे वाले नियम का मतलब है कि REIT विदेशी निवेशकों को जो भी बताएगा, वह भारतीय एक्सचेंज पर भारतीय निवेशकों तक भी पहुंचेगा। किसी REIT मैनेजर के खिलाफ शिकायत वाले यूनिटधारक SEBI के SCORES पोर्टल https://scores.sebi.gov.in का इस्तेमाल कर सकते हैं।

स्रोत: SEBI circular

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।