बाज़ार
सहायक कंपनी में हिस्सेदारी घटाने पर SEBI ने Som Distilleries और तीन अधिकारियों पर जुर्माना लगाया
SEBI ने Som Distilleries and Breweries और उसके तीन अधिकारियों पर 1-1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। SEBI ने पाया कि कंपनी ने शेयरधारकों की मंज़ूरी के बिना सहायक कंपनी में हिस्सेदारी घटाई।
SEBI ने 4 नवंबर 2026 के एक आदेश में Som Distilleries and Breweries Ltd, उसके चेयरमैन और प्रबंध निदेशक, एक पूर्णकालिक निदेशक और कंपनी सचिव पर 1-1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। SEBI के अधिनिर्णय अधिकारी ने पाया कि कंपनी ने अपने शेयरधारकों की पूर्व मंज़ूरी के बिना एक अहम सहायक कंपनी में अपनी हिस्सेदारी घटाई। हर किसी को आदेश मिलने के 45 दिन के भीतर अलग-अलग भुगतान करना होगा।
क्या हुआ
SEBI ने BSE और NSE पर सूचीबद्ध इस कंपनी की FY 2021 से FY 2024 तक की जांच की।
आदेश के अनुसार, उस समय पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी Woodpecker Distilleries and Breweries Private Limited का कंपनी के समेकित राजस्व में 2021-22 में 43.12% और 2022-23 में 47.34% हिस्सा था। 2023-24 में सहायक कंपनी ने राइट्स इश्यू जारी किया। कंपनी ने 10 करोड़ रुपये में 50 लाख शेयर लिए और बाकी हक दो प्रमोटरों के पक्ष में छोड़ दिया, जिन्होंने 20 करोड़ रुपये में 1 करोड़ शेयर और 10 करोड़ रुपये में 50 लाख शेयर लिए। इससे कंपनी की हिस्सेदारी 100% से घटकर 78.87% रह गई।
अधिनिर्णय अधिकारी ने माना कि यह किसी उपक्रम के लगभग पूरे हिस्से का निपटान था, जिसके लिए SEBI के लिस्टिंग नियमों के तहत विशेष प्रस्ताव और सार्वजनिक शेयरधारकों के बहुमत की मंज़ूरी ज़रूरी है, और यह मंज़ूरी नहीं ली गई। कंपनी की दलील थी कि राइट्स इश्यू का कुछ हिस्सा न लेना बिक्री नहीं है, और यह पैसा सहायक कंपनी के 70 करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय कार्यक्रम के लिए ज़रूरी था। अधिकारी ने कहा कि कारोबारी कारण राहत का आधार हो सकता है, पर इससे मंज़ूरी न लेने की कमी दूर नहीं होती।
नोटिस में यह आरोप भी था कि कंपनी ने एक संबंधित पक्ष, Aryavrat Projects and Developers Private Limited, के लिए State Bank of India को 21.36 करोड़ रुपये की कॉर्पोरेट गारंटी ऑडिट समिति की पूर्व मंज़ूरी के बिना दी। कंपनी ने कहा कि गारंटी कभी लागू नहीं हुई और 31 मार्च 2025 को समाप्त हो गई।
इसका क्या मतलब है
यह नियम सार्वजनिक शेयरधारकों को यह अधिकार देता है कि कोई सूचीबद्ध कंपनी अपने कारोबार का बड़ा हिस्सा छोड़े, उससे पहले वे मतदान करें। SEBI ने दोनों कार्यकारी निदेशकों को इस फ़ैसले के लिए और कंपनी सचिव को अनुपालन के लिए ज़िम्मेदार पाया। आदेश में दर्ज है कि SEBI पहले भी कंपनी पर जुर्माना लगा चुका है। यह नियामक का निष्कर्ष है और इसके खिलाफ Securities Appellate Tribunal में अपील की जा सकती है।
स्रोत: SEBI order
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