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कार्रवाई

Axis Mutual Fund फ्रंट-रनिंग मामले में SEBI ने दो ब्रोकरों पर 10-10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया

SEBI ने Woodstock Broking, Marfatia Stock Broking और दोनों के एक-एक निदेशक पर 10-10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। SEBI के अनुसार इन्होंने Axis Mutual Fund के सौदों की फ्रंट-रनिंग के लिए ट्रेडिंग टर्मिनल की सुविधा दी।

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आधिकारिक स्रोतSecurities and Exchange Board of India
Timeline of the SEBI case: the investigation covered 1 April 2021 to 31 March 2022, a connected order came on 24 July 2026, and the 3 November 2026 order fined two brokers and one director of each Rs 10 lakh apiece, payable within 45 days.
ओक्विलिया ग्राफ़िक। स्रोत: SEBI order, 3 November 2026

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने दो स्टॉक ब्रोकरों, Woodstock Broking Pvt. Ltd. और Marfatia Stock Broking Pvt. Ltd., तथा दोनों के एक-एक निदेशक पर 10-10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। 3 नवंबर 2026 के आदेश में SEBI के न्यायनिर्णयन अधिकारी ने पाया कि इन ब्रोकरों ने ऐसे सौदों में मदद की, जो SEBI के अनुसार Axis Mutual Fund के सौदों की फ्रंट-रनिंग थे।

क्या हुआ

फ्रंट-रनिंग का मतलब है किसी बड़े ग्राहक के ऑर्डर की पहले से जानकारी लेकर उससे पहले सौदे करना। SEBI की जांच 1 अप्रैल 2021 से 31 मार्च 2022 की अवधि की थी और यह निगरानी प्रणाली के अलर्ट के बाद शुरू हुई।

आदेश के अनुसार, दोनों ब्रोकरों ने अपना ट्रेडिंग टर्मिनल सॉफ्टवेयर दुबई में रहने वाले एक व्यक्ति के कंप्यूटर पर दूर से इंस्टॉल होने दिया, जो किसी भी ब्रोकर का अधिकृत व्यक्ति या डीलर नहीं था। SEBI ने पाया कि इसी व्यक्ति ने दुबई से इन ब्रोकरों के पास के खातों में फ्रंट-रनिंग सौदे किए। अधिकारी ने माना कि ब्रोकरों ने SEBI Act की धारा 12A और धोखाधड़ी व अनुचित व्यापार प्रथाओं से जुड़े नियमों का उल्लंघन किया, और दोनों के एक-एक निदेशक Act की धारा 27 के तहत जिम्मेदार हैं।

आदेश में कहा गया है कि सौदों से हुआ लाभ इस्तेमाल हुए ट्रेडिंग खातों से जोड़ा गया था, और उन खाताधारकों के खिलाफ 24 जुलाई 2026 के एक संबंधित SEBI आदेश में पहले ही लाभ लौटाने, जुर्माने और बाजार प्रतिबंध के निर्देश दिए जा चुके हैं। अन्य निदेशकों समेत छह अन्य नोटिसियों के खिलाफ कार्यवाही बिना जुर्माने के निपटा दी गई।

इसका क्या मतलब है

जुर्माने वाले चारों पक्षों को आदेश मिलने के 45 दिन के भीतर भुगतान करना होगा। ऐसा न करने पर SEBI वसूली की कार्यवाही शुरू कर सकता है, जिसमें संपत्ति की कुर्की और बिक्री शामिल है। इस आदेश के खिलाफ प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (SAT) में अपील की जा सकती है।

यह मामला दिखाता है कि SEBI ब्रोकरों को इस बात के लिए जिम्मेदार मानता है कि उनके ट्रेडिंग टर्मिनल असल में कौन चला रहा है। किसी SEBI-पंजीकृत ब्रोकर के खिलाफ शिकायत SEBI के SCORES पोर्टल https://scores.sebi.gov.in पर दर्ज की जा सकती है।

स्रोत: SEBI order

यह रिपोर्ट सार्वजनिक रिकॉर्ड पर मौजूद नियामकीय कार्रवाइयों और आरोपों का विवरण है, जो उद्धृत अधिकारियों के हवाले से दी गई है। कोई आदेश, एफआईआर या चार्जशीट दोषसिद्धि नहीं है; दोष सिद्ध होने तक सभी पक्ष निर्दोष माने जाते हैं।

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