बाज़ार
SAT ने रिको इंडिया के दो पूर्व अधिकारियों के खिलाफ SEBI के धोखाधड़ी निष्कर्ष बरकरार रखे
प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण ने SEBI का यह निष्कर्ष बरकरार रखा कि रिको इंडिया के पूर्व MD और पूर्व मार्केटिंग प्रमुख खातों की गलत रिपोर्टिंग में शामिल थे, लेकिन पूर्व MD का जुर्माना घटाकर 10 लाख रुपये कर दिया।
प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (SAT) ने 5 नवंबर 2026 को SEBI के ये निष्कर्ष बरकरार रखे कि रिको इंडिया लिमिटेड के एक पूर्व प्रबंध निदेशक और एक पूर्व मार्केटिंग प्रमुख कंपनी के वित्तीय विवरणों की गलत रिपोर्टिंग में सक्रिय रूप से शामिल थे। SAT ने पूर्व प्रबंध निदेशक का जुर्माना 50 लाख रुपये से घटाकर 10 लाख रुपये कर दिया और मार्केटिंग प्रमुख की अपील खारिज कर दी।
क्या हुआ
आदेश के अनुसार, SEBI के पूर्णकालिक सदस्य ने जनवरी 2023 के आदेश में कहा था कि 2012-13 से 2015 तक कंपनी का नेतृत्व करने वाले पूर्व प्रबंध निदेशक खातों की गलत रिपोर्टिंग की धोखाधड़ी में सक्रिय रूप से शामिल थे, और पूर्व मार्केटिंग प्रमुख ने फोर्थ डाइमेंशन सॉल्यूशन लिमिटेड (FDSL) और उससे जुड़ी संस्थाओं को अनुचित लाभ पहुंचाया। दोनों पर पांच साल तक निदेशक या प्रमुख प्रबंधकीय पद संभालने और तीन साल तक प्रतिभूति बाजार में प्रवेश पर रोक लगाई गई थी।
न्यायाधिकरण ने पाया कि पूर्व प्रबंध निदेशक FDSL से जुड़ी संस्थाओं के साथ एक किराया समझौता हस्ताक्षर के आठ महीने बाद बोर्ड के सामने लाए, और इस समझौते से उन संस्थाओं को कंपनी की कीमत पर 55.21 करोड़ रुपये का लाभ हुआ। न्यायाधिकरण ने कहा कि उन्होंने चार साल तक बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए नतीजे मंजूर किए और BSE पर दाखिल किए, और कंपनी को 1,123 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। उसने उनकी यह आपत्ति खारिज कर दी कि SEBI ने उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया।
जुर्माने पर SAT ने कहा कि इसी मामले में आरोपित पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारियों और मुख्य परिचालन अधिकारी पर 10-10 लाख रुपये का जुर्माना लगा था, और पूर्व प्रबंध निदेशक के साथ अलग व्यवहार का कोई कारण नहीं है। उसने मार्केटिंग प्रमुख पर 10 लाख रुपये का जुर्माना बरकरार रखा। SEBI के आदेश के बाकी सभी निर्देश लागू रहेंगे।
इसका क्या मतलब है
यह फैसला पुष्टि करता है कि निवेशकों को गुमराह करने वाले गलत खातों के लिए वरिष्ठ अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराए जा सकते हैं, भले ही उन्होंने हर भुगतान पर हस्ताक्षर न किए हों। आदेश के अनुसार, रिको इंडिया दिवाला प्रक्रिया से गुजरी और सार्वजनिक शेयरधारकों को ओपन ऑफर कीमत पर बाहर निकलने का मौका दिया गया। SAT के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की जा सकती है। लिस्टेड कंपनियों के खिलाफ शिकायत https://scores.sebi.gov.in पर की जा सकती है।
स्रोत: SAT order
यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।