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SAT ने कॉफी डे पर SEBI का 26 करोड़ रुपये का जुर्माना रद्द किया, नई जांच का आदेश
प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण ने कॉफी डे एंटरप्राइजेज के खिलाफ SEBI का 2023 का आदेश रद्द किया, जो SEBI के अनुसार 3,535 करोड़ रुपये के डायवर्जन से जुड़ा था, और SEBI को छह महीने में आगे जांच करने का निर्देश दिया।

फ़ोटो: Wikimedia Commons, CC0 1.0 (क्रॉप की गई)। सांकेतिक तस्वीर।
प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (SAT) ने 5 नवंबर 2026 को बहुमत से SEBI का जनवरी 2023 का वह आदेश रद्द कर दिया, जिसमें कॉफी डे एंटरप्राइजेज लिमिटेड (CDEL) को 26 करोड़ रुपये का जुर्माना भरने और प्रमोटर से जुड़ी एक कंपनी से बकाया वसूलने का निर्देश दिया गया था। न्यायाधिकरण ने SEBI को छह महीने के भीतर आगे जांच करने का निर्देश दिया।
क्या हुआ
आदेश के अनुसार, SEBI की जांच में पाया गया कि अप्रैल 2018 से जुलाई 2019 के बीच CDEL की सात सहायक कंपनियों से 3,535 करोड़ रुपये प्रमोटर परिवार के नियंत्रण वाली कंपनी मैसूर अमलगमेटेड कॉफी एस्टेट्स लिमिटेड (MACEL) में गए, और SEBI का आरोप है कि यह पैसा आगे समूह के दिवंगत चेयरमैन, उनके परिवार और संबंधित संस्थाओं तक पहुंचा। SEBI के पूर्णकालिक सदस्य ने CDEL को बकाया वसूलने के कदम उठाने का आदेश दिया था और 25 करोड़ रुपये और 1 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। आदेश में दर्ज है कि तब तक केवल 110.75 करोड़ रुपये वसूल हुए थे।
CDEL ने दलील दी कि सारे ट्रांसफर अकेले दिवंगत चेयरमैन ने किए थे और उस समय लिस्टिंग नियमों के तहत सहायक कंपनियों के लेनदेन के लिए उसकी मंजूरी जरूरी नहीं थी। SAT ने मार्च 2023 का वह अलग आदेश भी रद्द कर दिया, जिसमें MACEL पर 1 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था।
बहुमत ने SEBI को पूरे मामले की नए सिरे से जांच कर कानून के अनुसार आदेश पारित करने को कहा। SEBI अंतिम लाभार्थियों का पता लगाने के लिए शपथ पर बयान दर्ज कर सकता है, यह जांच सकता है कि 3,535 करोड़ रुपये के लेनदेन पर बैंकों और अधिकारियों ने कोई अलर्ट क्यों नहीं उठाया, इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं, और अंतिम लाभार्थियों के खिलाफ डिसगॉर्जमेंट (यानी लाभ लौटाने का आदेश) सहित शेयरधारकों की भरपाई पर विचार कर सकता है। न्यायाधिकरण ने कहा कि SEBI उसकी टिप्पणियों से प्रभावित न हो।
इसका क्या मतलब है
CDEL के शेयरधारकों के लिए जुर्माना और पहले के निर्देश अब लागू नहीं हैं, लेकिन मामला बंद नहीं हुआ है: SEBI को सार्वजनिक शेयरधारकों की भरपाई को ध्यान में रखकर फिर से जांच करनी होगी और नया आदेश देना होगा। ये SEBI के आरोप हैं और इस फैसले के बाद गलत काम का कोई अंतिम निष्कर्ष कायम नहीं है। SAT के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की जा सकती है। लिस्टेड कंपनी के खिलाफ शिकायत https://scores.sebi.gov.in पर की जा सकती है।
स्रोत: SAT order
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