कानूनी
SAT ने SEBI से Chrome Silicon के वारंट इश्यू पर शेयरधारक की शिकायतों की दोबारा जांच करने को कहा
सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल ने SEBI को एक शेयरधारक की चार शिकायतों पर दोबारा गौर करने का निर्देश दिया, जिनमें Chrome Silicon के 2018 के 1.2 करोड़ वारंट के प्रेफरेंशियल इश्यू में उल्लंघन का आरोप है।

फ़ोटो: Dominic / Wikimedia Commons, CC0 1.0 (क्रॉप की गई)। सांकेतिक तस्वीर।
सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) ने 28 अक्टूबर 2026 को SEBI को निर्देश दिया कि वह एक शेयरधारक, Pratibhuti Vinihit Ltd, और उसके निदेशक की Chrome Silicon Ltd (पहले VBC Ferro Alloys Ltd) के खिलाफ चार शिकायतों की दोबारा जांच करे। ये शिकायतें कंपनी के 2018 में 45 रुपये प्रति वारंट की दर से 1,20,00,000 कन्वर्टिबल वारंट के प्रेफरेंशियल इश्यू से जुड़ी हैं। प्रेफरेंशियल इश्यू का मतलब है जनता के बजाय चुने हुए निवेशकों को शेयर या वारंट बेचना।
क्या हुआ
आदेश के अनुसार, अपीलकर्ताओं ने SEBI से आठ शिकायतें की थीं और ट्रिब्यूनल के सामने दलील दी कि SEBI ने उचित कार्रवाई नहीं की। उन्होंने अपनी अपील को SEBI के खिलाफ एक ही प्रार्थना तक सीमित कर दिया।
आदेश के मुताबिक, अपीलकर्ताओं का आरोप है कि 2007 के राइट्स इश्यू के ड्राफ्ट दस्तावेज में प्रमोटर दिखाई गई तीन कंपनियों को बाद में वारंट इश्यू में गैर-प्रमोटर दिखाया गया। SEBI ने कहा था कि राइट्स इश्यू नहीं हुआ, इसलिए कार्रवाई की जरूरत नहीं है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि SEBI का इस पर दोबारा गौर करना उचित होगा।
आदेश के मुताबिक, अपीलकर्ताओं ने यह आरोप भी लगाया कि 2018 की वार्षिक आम बैठक में प्रमोटरों और निदेशकों ने नियमों के खिलाफ विशेष प्रस्ताव पर वोट किया, संबंधित पक्षों को वोटिंग से बाहर नहीं रखा गया, और कंपनी ने कीमत तय करने व जानकारी देने से जुड़े SEBI के इश्यू ऑफ कैपिटल नियमों का उल्लंघन किया। SAT ने SEBI से इन तीन शिकायतों पर भी दोबारा गौर करने को कहा। ट्रिब्यूनल ने अपीलकर्ताओं द्वारा दिए गए चार्ट के आधार पर मई 2018 में कंपनी के शेयरों की ट्रेडिंग में अचानक उछाल का जिक्र किया।
वारंट के जल्दी रूपांतरण और एक प्रस्तावित विलय समेत तीन अन्य शिकायतें नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल पर छोड़ दी गईं, जिसके अधिकार क्षेत्र को अपीलकर्ताओं ने स्वीकार किया। एक शिकायत पर जोर नहीं दिया गया।
इसका क्या मतलब है
SAT ने कंपनी के खिलाफ कोई निष्कर्ष नहीं दिया है; उसने SEBI से कहा कि वह NCLT की कार्यवाही को ध्यान में रखते हुए स्वतंत्र रूप से और कानून के मुताबिक मामले की जांच करे। SEBI के वकील के अनुसार NCLT में मामला 31 दिसंबर 2026 को सूचीबद्ध है। अपीलकर्ताओं को NCLT की घटनाओं की जानकारी SEBI को देते रहना होगा। SAT के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की जा सकती है। सूचीबद्ध कंपनियों के खिलाफ शिकायत https://scores.sebi.gov.in पर दर्ज की जा सकती है।
स्रोत: SAT order
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