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राजस्थान हाई कोर्ट: बैंक की सहमति के बिना DRT वन-टाइम सेटलमेंट की मियाद नहीं बढ़ा सकता
राजस्थान हाई कोर्ट की खंडपीठ ने 2 नवंबर 2026 को कहा कि DRT, Bank of Baroda की सहमति के बिना उसके साथ हुए सेटलमेंट में कर्जदार को 12 महीने और नहीं दे सकता था।
राजस्थान हाई कोर्ट की जयपुर पीठ की खंडपीठ ने कहा है कि ऋण वसूली अधिकरण (DRT), जयपुर को यह अधिकार नहीं था कि वह Bank of Baroda के साथ हुए वन-टाइम सेटलमेंट (OTS) में कर्जदार को बैंक की सहमति के बिना भुगतान के लिए 12 महीने और दे। 2 नवंबर 2026 को सुनाए गए फैसले में अदालत ने कर्जदार कंपनी U.N. Automobiles Private Limited के एक निलंबित निदेशक की अपील खारिज कर दी और 29 अगस्त 2025 के एकल पीठ के फैसले को बरकरार रखा।
क्या हुआ
फैसले के अनुसार, Bank of Baroda ने कंपनी के कर्ज अपने हाथ में लिए थे और आखिरी मंजूरी में करीब 47.46 करोड़ रुपये की सुविधाएं थीं। खाता 29 अगस्त 2012 को एनपीए घोषित हुआ और बैंक ने DRT में वसूली की कार्यवाही शुरू की। 24 दिसंबर 2015 को मंजूर OTS के तहत कंपनी को करीब 65.79 करोड़ रुपये के कुल बकाये के बदले करीब 44.83 करोड़ रुपये चुकाने थे। DRT ने इस सेटलमेंट को सहमति आदेश में दर्ज किया और 31 मार्च 2018 की समय-सीमा बाद में 30 जून 2018 तक बढ़ाई गई।
समय पर भुगतान न होने पर बैंक ने सितंबर 2018 में लिखा कि OTS विफल हो गया है। कर्जदार ने DRT से कहा कि बैंक ने गिरवी संपत्तियों की बिक्री में अड़चनें डालीं, जिसे बैंक ने नकारा। 23 मई 2023 को DRT ने देरी के लिए बैंक को जिम्मेदार माना और भुगतान के लिए 12 महीने और दे दिए। एकल पीठ ने यह आदेश रद्द कर दिया और कहा कि DRT को सेटलमेंट बदलने का अधिकार नहीं था।
खंडपीठ को उस फैसले में कोई "स्पष्ट त्रुटि या विकृति" नहीं मिली। उसने कहा कि एकल पीठ ने यह निष्कर्ष निकाला था कि बैंक की सहमति के बिना अतिरिक्त समय देकर DRT ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर काम किया। फैसले में यह भी दर्ज है कि राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (NCLT), जयपुर ने बैंक की याचिका पर 28 अगस्त 2024 को कंपनी को दिवाला प्रक्रिया में दाखिल किया।
इसका क्या मतलब है
बैंक के साथ कर्ज का सेटलमेंट करने वाले कर्जदारों के लिए यह फैसला बताता है कि DRT में दर्ज वन-टाइम सेटलमेंट की समय-सीमा उन पर बाध्यकारी है। इस फैसले के अनुसार, समय-सीमा बीत जाने के बाद अधिकरण कर्जदाता की सहमति के बिना उसे नहीं बढ़ा सकता। इस मामले में 30 जून 2018 तक की पिछली मोहलत खुद बैंक ने दी थी।
स्रोत: High Court judgment
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