कार्रवाई
राजस्थान ACB ने पंचायत समिति तालेड़ा के संविदाकर्मी भानूप्रताप सिंह को रिश्वत लेते पकड़ा
राजस्थान ACB के अनुसार, बूंदी जिले की पंचायत समिति तालेड़ा के संविदा पर कार्यरत जूनियर टेक्निकल असिस्टेंट को 28 अक्टूबर 2026 को 70,000 रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा गया।
राजस्थान के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की प्रेस नोट के अनुसार, बूंदी जिले की पंचायत समिति तालेड़ा में पदस्थापित जूनियर टेक्निकल असिस्टेंट (संविदाकर्मी) भानूप्रताप सिंह को 28 अक्टूबर 2026 को 70,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया। यह ट्रैप कार्रवाई ACB मुख्यालय, जयपुर के निर्देश पर ACB की आसूचना इकाई, कोटा ने की।
क्या हुआ
ACB के अनुसार, कोटा आसूचना इकाई को शिकायत मिली कि आरोपी परिवादी द्वारा कराए गए कार्यों के बिलों के भुगतान संबंधी काम के बदले 70,000 रुपये मांग रहा था और उसे परेशान कर रहा था।
ब्यूरो ने बताया कि 28 अक्टूबर 2026 को कोटा रेंज के उप महानिरीक्षक पुलिस के पर्यवेक्षण में ट्रैप कार्रवाई की गई, जिसमें आरोपी को परिवादी से 70,000 रुपये लेते पकड़ा गया।
ACB ने कहा कि आरोपी से पूछताछ और आगे की कार्रवाई जारी है। ब्यूरो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे जांच करेगा।
ये आरोप हैं, दोष के निष्कर्ष नहीं; अदालत में दोष सिद्ध होने तक आरोपी निर्दोष माने जाते हैं, और कानूनी प्रक्रिया जारी है।
इसका क्या मतलब है
यह मामला पंचायत समिति, यानी ग्रामीण स्थानीय शासन के ब्लॉक स्तर, के जरिए कराए गए कामों के बिलों के भुगतान से जुड़ा है। यह गिरफ्तारी दिखाती है कि ब्यूरो नियमित अधिकारियों के साथ-साथ सरकारी दफ्तरों में तैनात संविदाकर्मियों के खिलाफ शिकायतों पर भी कार्रवाई करता है।
ACB की नोट में कहा गया है कि जिस व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज होता है, वह सीधे ब्यूरो से संपर्क कर अपना पक्ष या स्पष्टीकरण रख सकता है, और ब्यूरो उसकी विस्तृत जांच के बाद ही अनुसंधान पर फैसला लेता है।
राजस्थान में किसी अधिकारी द्वारा रिश्वत मांगे जाने पर पाठक ACB के टोल फ्री नंबर 1064 या व्हाट्सएप हेल्पलाइन 94135-02834 पर संपर्क कर सकते हैं, जो ब्यूरो के अनुसार 24x7 चालू हैं, और ब्यूरो का कहना है कि वह वैध काम कराने में पूरी मदद करेगा। सभी राज्यों की हेल्पलाइन Oquilia की गाइड https://www.oquilia.com/report-a-bribe पर उपलब्ध हैं।
स्रोत: Rajasthan ACB press note
यह रिपोर्ट सार्वजनिक रिकॉर्ड पर मौजूद नियामकीय कार्रवाइयों और आरोपों का विवरण है, जो उद्धृत अधिकारियों के हवाले से दी गई है। कोई आदेश, एफआईआर या चार्जशीट दोषसिद्धि नहीं है; दोष सिद्ध होने तक सभी पक्ष निर्दोष माने जाते हैं।
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