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पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने PMLA के आठ आरोपियों की जमानत रद्द करने की ED की याचिकाएं खारिज कीं

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने 28 अक्टूबर 2026 को जमानत रद्द करने की ED की आठ याचिकाएं खारिज कर दीं। कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी का आधार बताने का दायित्व PMLA में शुरू से था।

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आधिकारिक स्रोतPunjab and Haryana High Court
Rows of old bound law reports on a dark shelf

फ़ोटो: Dominic / Wikimedia Commons, CC0 1.0 (क्रॉप की गई)। सांकेतिक तस्वीर।

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने 28 अक्टूबर 2026 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की वे आठ याचिकाएं खारिज कर दीं, जिनमें मनी लॉन्ड्रिंग मामलों के आठ आरोपियों की जमानत रद्द करने की मांग की गई थी। आरोपियों को 24 जुलाई से 21 अगस्त 2023 के बीच गिरफ्तार किया गया था और पंचकूला की स्पेशल कोर्ट ने उन्हें इसलिए जमानत दी थी, क्योंकि उन्हें गिरफ्तारी के आधार लिखित में नहीं दिए गए थे। हाई कोर्ट ने आठों जमानत आदेश बरकरार रखे।

क्या हुआ

फैसले के अनुसार, ED ने आरोपियों को Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के मामलों में गिरफ्तार किया था और सितंबर व अक्टूबर 2023 में अभियोजन शिकायतें दाखिल की गई थीं। स्पेशल कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के 3 अक्टूबर 2023 के फैसले के आधार पर जमानत दी, जिसमें कहा गया था कि गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के लिखित आधार की प्रति दी जानी चाहिए।

ED का तर्क था कि सुप्रीम कोर्ट ने यह नियम "henceforth" यानी केवल 3 अक्टूबर 2023 से लागू करने को कहा था। चूंकि आठों गिरफ्तारियां उस तारीख से पहले हुई थीं और आधार मौखिक रूप से बताए गए थे, इसलिए उसके अनुसार इस आधार पर जमानत नहीं दी जानी चाहिए थी।

कोर्ट ने ED के तर्क को गलत बताया। कोर्ट ने कहा कि PMLA की धारा 19 में हमेशा से यह जरूरी था कि गिरफ्तार करने वाला अधिकारी आरोपी को गिरफ्तारी के आधार बताए, और सुप्रीम कोर्ट ने केवल यह तय किया कि यह कैसे किया जाए: लिखित में। कोर्ट ने यह भी कहा कि ED ने आरोपियों द्वारा जमानत के दुरुपयोग का कोई आरोप नहीं लगाया। कोर्ट के अनुसार, ED की बात मानने का मतलब होता हर उस मामले में जमानत दोबारा खोलना, जहां वह पहले ही दी जा चुकी है।

इसका क्या मतलब है

यह फैसला पुष्टि करता है कि PMLA के तहत गिरफ्तार हर व्यक्ति को यह जानने का अधिकार है कि उसे क्यों गिरफ्तार किया गया, और कोर्ट के अनुसार यह अधिकार कानून से ही आता है, किसी बाद के फैसले से नहीं। गिरफ्तारी के आधार न देने पर मिली जमानत केवल इसलिए रद्द नहीं होगी कि गिरफ्तारी अक्टूबर 2023 से पहले हुई थी, जब तक जमानत का दुरुपयोग न हो।

आरोपियों के खिलाफ मामले जारी हैं। ये आरोप हैं, दोष के निष्कर्ष नहीं; अदालत में दोष सिद्ध होने तक आरोपियों को निर्दोष माना जाता है, और कानूनी प्रक्रिया जारी है।

स्रोत: High Court judgment

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।