कानूनी
पुराने लाइसेंस पर कार क्लेम ठुकराने के मामले में पंजाब आयोग ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस की अपील खारिज की
पंजाब राज्य उपभोक्ता आयोग ने कार नुकसान का वह क्लेम चुकाने का आदेश बरकरार रखा, जिसे यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस ने ड्राइवर के 1980 के दशक के मूल लाइसेंस का रिकॉर्ड किसी और के नाम होने पर ठुकरा दिया था।

फ़ोटो: Blogtrepreneur / Wikimedia Commons, CC BY 2.0 (क्रॉप की गई)। सांकेतिक तस्वीर।
पंजाब राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने 21 अक्टूबर 2026 को यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी की अपील खारिज कर दी और एक कार के ओन-डैमेज क्लेम को चुकाने का आदेश बरकरार रखा। बीमा कंपनी ने यह कहकर क्लेम ठुकराया था कि ड्राइवर का 1980 के दशक का मूल लाइसेंस किसी और के नाम दर्ज है।
क्या हुआ
आदेश के अनुसार, न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी के स्वामित्व वाली यह कार 20 नवंबर 2019 से 19 नवंबर 2020 तक यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस से बीमित थी, और 8 फरवरी 2020 को बिजली के खंभे से टकरा गई। बीमा कंपनी के सर्वेयर ने नुकसान 3,74,969 रुपये आंका और कार की मरम्मत अधिकृत डीलर के यहां 3,64,593 रुपये में हुई। यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस ने 6 अक्टूबर 2020 को परिवहन कार्यालय की एक रिपोर्ट का हवाला देकर क्लेम ठुकरा दिया कि ड्राइवर का पुराना बेसिक लाइसेंस किसी और का है।
आयोग ने पाया कि ड्राइवर का लाइसेंस 1991-92 में जारी हुआ था और लाइसेंसिंग अधिकारियों ने इसे कई बार रिन्यू किया, और यह नॉन-ट्रांसपोर्ट वाहनों के लिए 1 मार्च 2023 तक वैध था। बीमा कंपनी ने केवल क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण, होशियारपुर का एक उद्धरण पेश किया; लाइसेंस को फर्जी साबित करने के लिए न किसी परिवहन अधिकारी की गवाही कराई और न कोई हलफनामा दिया। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के फैसलों के आधार पर आयोग ने कहा कि अगर रिन्यूअल असली हों और बीमित व्यक्ति को किसी खामी की जानकारी न हो, तो सिर्फ इस आधार पर क्लेम नहीं ठुकराया जा सकता कि लाइसेंस शुरू में किसी संदिग्ध लाइसेंस पर आधारित था।
आयोग ने होशियारपुर जिला आयोग के 12 अप्रैल 2024 के आदेश को बरकरार रखा, जिसमें बीमा कंपनी को मरम्मत के भुगतान की तारीख से 6% सालाना ब्याज के साथ ओन-डैमेज क्लेम निपटाने और चुकाने, तथा 25,000 रुपये खर्च व मुआवजा 45 दिन में देने का निर्देश था; भुगतान न होने पर 3% अतिरिक्त ब्याज लगेगा। अपील के समय बीमा कंपनी द्वारा जमा 12,500 रुपये कार के मालिक को मिलेंगे।
इसका क्या मतलब है
आदेश कहता है कि फर्जी लाइसेंस के आधार पर मोटर क्लेम ठुकराने वाली बीमा कंपनी को इसे साबित करना होगा, और जब लाइसेंस वास्तव में रिन्यू हुआ हो तो वह सिर्फ पुराने रिकॉर्ड पर शक के सहारे क्लेम नहीं ठुकरा सकती। ऐसे आधार पर क्लेम ठुकराए जाने पर वाहन मालिक इसे चुनौती दे सकते हैं। इस आदेश के खिलाफ अपील की जा सकती है। शिकायत e-Daakhil या राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 के जरिए की जा सकती है।
स्रोत: Consumer commission order
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