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पंजाब उपभोक्ता आयोग: प्लॉट नंबर की गलती पर ठुकराया गया चोरी क्लेम चुकाए यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस

पंजाब राज्य उपभोक्ता आयोग ने कहा कि बैंक की करवाई पॉलिसी में गलत प्लॉट नंबर से लुधियाना की एक फर्म का चोरी क्लेम खत्म नहीं होता, और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस व केनरा बैंक को भुगतान का आदेश दिया।

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आधिकारिक स्रोतConsumer commission
Circular steel vault door with bolts and time locks

फ़ोटो: Joe Mabel / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0 (क्रॉप की गई)। सांकेतिक तस्वीर।

पंजाब राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने 28 अक्टूबर 2026 को यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को लुधियाना की एक निटवियर फर्म का वह चोरी क्लेम चुकाने का आदेश दिया, जिसे पॉलिसी में गलत प्लॉट नंबर होने के कारण ठुकरा दिया गया था। आयोग ने बीमा करवाने वाले केनरा बैंक को भी सेवा में कमी का दोषी माना और उसे 75,000 रुपये देने का आदेश दिया।

क्या हुआ

आदेश के अनुसार, फर्म के मालिक ने केनरा बैंक से लोन और कैश क्रेडिट लिमिट ली थी, और बैंक ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस की पॉलिसियों से फर्म की मशीनरी और स्टॉक का बीमा करवाया था। 28-29 नवंबर 2014 की रात चोरी के बाद बीमा कंपनी ने अक्टूबर 2015 में क्लेम यह कहकर ठुकरा दिया कि चोरी की पॉलिसी प्लॉट नंबर 14 के लिए थी, जबकि नुकसान प्लॉट नंबर 16 पर हुआ। लुधियाना जिला आयोग ने फरवरी 2022 में शिकायत खारिज कर दी थी।

अपील पर राज्य आयोग ने पाया कि उसी अवधि की बीमा कंपनी की अपनी फायर पॉलिसी में प्लॉट नंबर 16 लिखा था, उसके जांचकर्ता ने केवल प्लॉट नंबर 16 का निरीक्षण किया था, और ऐसा कुछ नहीं दिखा कि फर्म के दो परिसर थे। आयोग ने माना कि प्लॉट नंबर 14 टाइपिंग की गलती थी। स्टॉक वाली दूसरी पॉलिसी में फर्म का पुराना पता था; आयोग ने पाया कि बैंक के अपने सैंक्शन लेटर और स्टॉक स्टेटमेंट में प्लॉट नंबर 16 दर्ज था, इसलिए बैंक को बीमा कंपनी को सही पता देना चाहिए था।

आयोग ने जिला आयोग का आदेश रद्द कर दिया। उसने बीमा कंपनी को जांचकर्ता द्वारा आंका गया मशीनरी का नुकसान 2,13,000 रुपये चुकाने और स्टॉक के नुकसान का आकलन कर क्लेम निपटाने का निर्देश दिया। केनरा बैंक को मुआवजे और मुकदमे के खर्च के रूप में 75,000 रुपये देने होंगे। आदेश मिलने के 60 दिन में पालन करना होगा, ऐसा न होने पर बीमा कंपनी दावा की गई 15 लाख रुपये की रकम चुकाने की जिम्मेदार होगी।

इसका क्या मतलब है

आदेश कहता है कि जब बीमा कंपनी के अपने रिकॉर्ड और जांच सही परिसर की ओर इशारा करें, तो वह पॉलिसी में पते की साफ गलती के आधार पर क्लेम नहीं ठुकरा सकती, और कर्जदार के लिए बीमा करवाने वाले बैंक को बीमा कंपनी को सही पता देना चाहिए। जिन कर्जदारों के स्टॉक या मशीनरी का बीमा बैंक करवाता है, वे जांच लें कि पॉलिसी में सही परिसर दर्ज है। इस आदेश के खिलाफ अपील की जा सकती है। क्लेम ठुकराए जाने पर पॉलिसीधारक e-Daakhil या राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 से शिकायत कर सकते हैं।

स्रोत: Consumer commission order

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।