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पटना हाईकोर्ट ने Canara Bank की SARFAESI कार्रवाई के खिलाफ कर्जदार की याचिका खारिज की

पटना हाईकोर्ट ने Canara Bank की वसूली कार्रवाई के खिलाफ एक कर्जदार की रिट याचिका खारिज कर दी और कहा कि उन्हें SARFAESI Act में दिया गया उपाय अपनाना चाहिए।

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आधिकारिक स्रोतPatna High Court
Brass combination dials and locks on an old vault door

फ़ोटो: Steven Bornholtz / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0 (क्रॉप की गई)। सांकेतिक तस्वीर।

पटना हाईकोर्ट ने 29 अक्टूबर 2026 को SARFAESI Act के तहत Canara Bank की वसूली कार्रवाई के खिलाफ एक कर्जदार की रिट याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि जिस कर्जदार के पास इस कानून के तहत कारगर उपाय मौजूद है, उसे उसी का इस्तेमाल करना चाहिए, और विवाद के गुण-दोष पर कोई फैसला नहीं दिया। बैंक ने अदालत को बताया कि 31 जनवरी 2024 तक कर्जदार पर 66.01 लाख रुपये बकाया थे।

क्या हुआ

याचिकाकर्ता लखीसराय जिले की एक कारोबारी महिला हैं, जिन्होंने अपनी संपत्ति गिरवी रखकर Canara Bank से कर्ज लिया था। उन्होंने अदालत को बताया कि 2020 में आग से उनका गोदाम नष्ट हो गया, जिससे कारोबार को नुकसान हुआ। उन्होंने SARFAESI Act की Section 13(2) के तहत बैंक के 11 अप्रैल 2023 के डिमांड नोटिस और 30 अक्टूबर 2023 के बिक्री नोटिस को चुनौती दी थी। SARFAESI Act वह कानून है जिसके तहत बैंक कर्ज के बदले गिरवी रखी संपत्ति को कब्जे में लेकर बेच सकता है। उनकी दलील थी कि नोटिस ठीक से तामील नहीं किए गए; उन्होंने कहा कि वे कर्ज चुकाने को तैयार हैं और बैंक के हिसाब पर सवाल उठाया।

फैसले के अनुसार, बैंक ने कहा कि कर्जदार ने 68.10 लाख रुपये की ऋण सुविधाएं ली थीं, 10 अप्रैल 2023 को खाते NPA (गैर-निष्पादित) घोषित हुए और 27 जुलाई 2023 को कब्जे का नोटिस जारी हुआ। बैंक के मुताबिक नोटिस विधिवत तामील किए गए थे।

सुनवाई के दौरान अदालत ने दिसंबर 2024 में इस शर्त पर बेदखली रोकी थी कि वे 15 लाख रुपये जमा करें, जो उन्होंने देरी से जमा किए। बाद में 13 अक्टूबर 2025 को एक खंडपीठ ने निर्देश दिया कि याचिका पर फैसला होने तक उनके पक्ष का एक अंतरिम आदेश लागू नहीं होगा।

सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि जहां कानून में कारगर वैधानिक उपाय उपलब्ध हो, वहां हाईकोर्ट को आम तौर पर संविधान के Article 226 के तहत रिट याचिका पर सुनवाई नहीं करनी चाहिए। अदालत ने याचिका खारिज कर दी और कर्जदार को वैधानिक उपाय अपनाने की छूट दी।

इसका क्या मतलब है

SARFAESI Act के तहत बैंक से कब्जे या बिक्री का नोटिस पाने वाले कर्जदारों के लिए यह फैसला याद दिलाता है कि हाईकोर्ट आम तौर पर रिट याचिका सुनने के बजाय उन्हें इसी कानून में दिए गए उपाय की ओर भेजेगा। अदालत ने इस पर कोई राय नहीं दी कि बैंक के नोटिस या बकाया की रकम सही थी या नहीं। बैंक की सेवा से जुड़ी शिकायत कर्जदार RBI के पोर्टल https://cms.rbi.org.in पर भी कर सकते हैं।

स्रोत: High Court judgment

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।