कानूनी
पटना हाई कोर्ट ने SBI को विधवा से 3.51 लाख रुपये की अतिरिक्त पेंशन वसूलने से रोका
पटना हाई कोर्ट ने SBI की अपील खारिज कर 94 साल की विधवा से 3,51,020 रुपये की अतिरिक्त फैमिली पेंशन की वसूली रोकने का आदेश बरकरार रखा; यह भुगतान बैंक की अपनी गलती से हुआ था।
पटना हाई कोर्ट ने 28 October 2026 को State Bank of India की अपील खारिज कर दी और उस आदेश को बरकरार रखा जिसने बैंक को अब 94 साल की एक विधवा से 3,51,020 रुपये की अतिरिक्त फैमिली पेंशन वसूलने से रोका था। कोर्ट ने कहा कि यह अतिरिक्त भुगतान बैंक के अपने पेंशन रिकॉर्ड की गलतियों के कारण हुआ।
क्या हुआ
फैसले के अनुसार, सारण जिले में लोक निर्माण विभाग के एक सेवानिवृत्त सड़क मजदूर की विधवा SBI की एक शाखा से फैमिली पेंशन ले रही थीं। बैंक के सिस्टम में उनकी पेंशन गलती से "रेगुलर पेंशन" दर्ज थी और जन्मतिथि भी गलत थी, इसलिए छठे वेतन आयोग के संशोधन के बाद भी उन्हें वृद्धावस्था की बढ़ोतरी मिलती रही। गलती सुधारने के बाद बैंक ने कहा कि 1 April 2007 से 30 November 2018 तक 3,51,020 रुपये ज्यादा दिए गए। December 2018 में बैंक ने उनकी मासिक पेंशन 15,445 रुपये से घटाकर 7,196 रुपये कर दी और वसूली शुरू की।
एकल न्यायाधीश ने 30 September 2022 को वसूली रद्द कर दी थी। अपील में बैंक ने उस वचनपत्र का हवाला दिया जिस पर उन्होंने अंगूठा लगाकर अतिरिक्त राशि लौटाने की बात मानी थी। खंडपीठ ने कहा कि वचनपत्र होने से परिस्थितियों को देखने की जरूरत खत्म नहीं होती। कोर्ट ने कहा कि वे निरक्षर हैं, गलत वर्गीकरण में उनकी कोई भूमिका नहीं थी, वसूली शुरू होते समय उनकी उम्र करीब 89 साल थी और वे गुजारे के लिए पेंशन पर निर्भर थीं, जबकि गलती ग्यारह साल से ज्यादा चली। कोर्ट ने माना कि इस मामले में उनकी कठिनाई बैंक के वसूली के हित से ज्यादा भारी है।
इसका क्या मतलब है
कोर्ट ने साफ किया कि वह यह सामान्य नियम नहीं बना रहा कि बैंक की गलती से दी गई अतिरिक्त पेंशन कभी वसूली नहीं जा सकती, या धोखाधड़ी न होने पर वसूली हमेशा रुकेगी। फैसला इस मामले के तथ्यों पर टिका है: उम्र, निरक्षरता, गलती में कोई भूमिका न होना, लंबी अवधि और मासिक कटौती का असर।
बैंक की अपनी गलती पर वसूली नोटिस झेल रहे बुजुर्ग फैमिली पेंशनरों के लिए यह फैसला दिखाता है कि अदालतें बैंक के वसूली के अधिकार के साथ कठिनाई को भी तौलती हैं। बैंक के खिलाफ शिकायत RBI के पास https://cms.rbi.org.in पर भी की जा सकती है।
स्रोत: High Court judgment
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