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ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट के बाद फ्लैट खरीदा तो देरी का ब्याज नहीं: K-REAT

कर्नाटक रियल एस्टेट अपीलीय न्यायाधिकरण ने कहा कि आंशिक ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट के बाद फ्लैट खरीदने वाला देरी का ब्याज नहीं मांग सकता, पर 250 रुपये प्रति वर्ग फुट की मांग पर रोक लगाई।

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आधिकारिक स्रोतKarnataka Real Estate Appellate Tribunal
कानूनी / 31 अक्टूबर 2026

कर्नाटक रियल एस्टेट अपीलीय न्यायाधिकरण (K-REAT) ने 30 अक्टूबर 2026 को कहा कि जिस घर खरीदार ने परियोजना का आंशिक ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी होने के बाद फ्लैट खरीदा, वह कब्ज़े में देरी का ब्याज नहीं मांग सकता। फिर भी न्यायाधिकरण ने कहा कि बेंगलुरु की नितेश सीज़र्स पैलेस परियोजना के प्रमोटर खरीदार से एस्केलेशन शुल्क नहीं मांग सकते।

क्या हुआ

फैसले के अनुसार, खरीदार ने 18 जनवरी 2018 की रजिस्टर्ड सेल डीड से 73 लाख रुपये में फ्लैट खरीदा था, जिसमें बिजली-पानी कनेक्शन और सिंकिंग फंड जैसी सुविधाओं का शुल्क शामिल था। खरीदार की शिकायत थी कि कई सुविधाएं नहीं दी गईं और परियोजना अपने हाथ में लेने वाली फर्म ने 250 रुपये प्रति वर्ग फुट अतिरिक्त मांगे। कर्नाटक रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (K-RERA) ने 10 मार्च 2025 को शिकायत खारिज कर दी थी।

K-REAT ने कहा कि इसी परियोजना के एक दूसरे खरीदार की अपील में, जिसका फैसला उसी दिन हुआ, उसने देरी का ब्याज दिया था क्योंकि उस खरीदार की सेल डीड ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट से पहले की थी। न्यायाधिकरण के अनुसार यहां तथ्य अलग हैं: प्रमोटर को आंशिक ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट 27 दिसंबर 2017 को मिल गया था, जो इस खरीदार की सेल डीड से पहले था। न्यायाधिकरण ने कहा कि कर्नाटक RERA नियमों के तहत किसी परियोजना के एक चरण का आंशिक ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट उस चरण के लिए पूरा सर्टिफिकेट माना जाता है। उसने यह भी कहा कि बिक्री का कोई समझौता पेश नहीं किया गया, और किसी खरीदार ने सर्टिफिकेट को चुनौती नहीं दी, इसलिए वह अंतिम हो चुका है।

अतिरिक्त शुल्क पर न्यायाधिकरण ने पाया कि सेल डीड में एस्केलेशन शुल्क की कोई शर्त नहीं है। उसने K-RERA का आदेश संशोधित कर कहा कि प्रमोटर खरीदार से कोई एस्केलेशन शुल्क नहीं मांग सकते।

इसका क्या मतलब है

यह फैसला चरणों में बनी परियोजनाओं के खरीदारों के लिए एक रेखा खींचता है: जिन्होंने किसी चरण को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट मिलने के बाद खरीदा, वे आम तौर पर देरी का ब्याज नहीं मांग सकते, जबकि पहले के खरीदार मांग सकते हैं। दोनों ही स्थितियों में बिल्डर ऐसे शुल्क नहीं जोड़ सकता जो सेल डीड में नहीं हैं। K-REAT के इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की जा सकती है।

स्रोत: K-REAT judgment

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।