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NCLT ने Stellence Pharmscience की समाधान योजना कर्मचारियों के बकाये पर लेनदारों को लौटाई

NCLT की बेंगलुरु पीठ ने Stellence Pharmscience की समाधान योजना लेनदारों को लौटा दी है। पीठ ने कहा कि योजना कानून के मुताबिक ऑपरेशनल लेनदारों के हितों की रक्षा करती नहीं दिखती।

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आधिकारिक स्रोतNational Company Law Tribunal
कानूनी / 5 नवंबर 2026

राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (NCLT) की बेंगलुरु पीठ ने Stellence Pharmscience Pvt Ltd की समाधान योजना को फिलहाल मंजूरी देने से इनकार कर दिया है और इसे दोबारा विचार के लिए कंपनी के लेनदारों को लौटा दिया है। 27 अक्टूबर 2026 को सुनाए गए आदेश में अधिकरण ने कहा कि यह योजना, जो कर्मचारियों, कामगारों और अन्य ऑपरेशनल लेनदारों को उनके दावों का 4.95% देती है, दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (IBC) के अनुरूप नहीं दिखती। मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर 2026 को होगी।

क्या हुआ

Religare Finvest Ltd की याचिका पर Stellence Pharmscience को 6 मार्च 2024 को कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया में भेजा गया था। यह डिफॉल्ट करने वाली कंपनियों को बचाने की अधिकरण की निगरानी वाली प्रक्रिया है। चार वित्तीय लेनदारों वाली लेनदारों की समिति ने 15 अप्रैल 2025 को 100% वोट से समाधान योजना को मंजूरी दी थी।

आदेश में दिए ब्योरे के मुताबिक, योजना में 35.07 करोड़ रुपये का दावा करने वाले सुरक्षित वित्तीय लेनदारों को 27.60 करोड़ रुपये यानी 78.69% मिलेंगे। 1.58 करोड़ रुपये का दावा करने वाले कर्मचारियों को लगभग 7.20 लाख रुपये और 12.01 लाख रुपये का दावा करने वाले कामगारों को लगभग 59,555 रुपये मिलेंगे, यानी दोनों को दावे का 4.95%। भविष्य निधि (PF) का बकाया पूरा देने का प्रावधान है।

अधिकरण ने कहा कि योजना समाधान आवेदक की इस धारणा पर टिकी थी कि कंपनी का परिसमापन मूल्य इतना कम है कि ऑपरेशनल लेनदारों के लिए कुछ नहीं बचता, और लेनदारों की समिति की बैठकों के ब्योरे से नहीं दिखता कि समिति ने इस पर विचार किया। अधिकरण ने माना कि योजना संहिता की धारा 30(2)(b) के अनुरूप नहीं दिखती, जिसके तहत ऑपरेशनल लेनदारों को कम से कम उतना मिलना चाहिए जितना परिसमापन में मिलता। अधिकरण ने समाधान आवेदक पर ड्यू डिलिजेंस रिपोर्ट को भी दोषपूर्ण पाया, क्योंकि उसमें आवेदक की नेटवर्थ 14 जुलाई 2023 की ली गई थी, यानी दिवाला प्रक्रिया शुरू होने से पहले की।

इसका क्या मतलब है

लेनदारों की समिति को योजना पर दोबारा विचार करना होगा, सुधार के कदम उठाने होंगे और अगली सुनवाई से पहले अधिकरण को जानकारी देनी होगी। अधिकरण ने कहा कि तब तक दिवाला प्रक्रिया की अवधि बढ़ी हुई मानी जाएगी। कंपनी के कर्मचारियों, कामगारों और आपूर्तिकर्ताओं के लिए इस आदेश का मतलब है कि लेनदारों को दिखाना होगा कि योजना उनके दावों के साथ कम से कम उतना बर्ताव करती है जितना कानून कहता है। इस आदेश के खिलाफ राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय अधिकरण (NCLAT) में अपील की जा सकती है।

स्रोत: NCLT order

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।