कंपनी मामले
कोई समाधान योजना न आने पर NCLT ने सुवेनियर डेवलपर्स के परिसमापन का आदेश दिया
NCLT की मुंबई बेंच ने दिवाला प्रक्रिया में कोई समाधान योजना न आने पर एक सहकारी ऋण संस्था के दावे पर सुवेनियर डेवलपर्स (इंडिया) के परिसमापन का आदेश दिया है।
राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) की मुंबई बेंच ने 3 नवंबर 2026 को सुवेनियर डेवलपर्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड के परिसमापन (लिक्विडेशन) का आदेश दिया, क्योंकि दिवाला प्रक्रिया के दौरान कोई समाधान योजना नहीं आई। कंपनी की इकलौती लेनदार, सहकारी ऋण संस्था समता नागरी सहकारी पतसंस्था मर्यादित, का स्वीकृत दावा 1,22,48,573 रुपये (लगभग 1.22 करोड़ रुपये) था।
क्या हुआ
न्यायाधिकरण ने संस्था की याचिका पर 1 अगस्त 2023 को कंपनी को कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) में लिया था। यह डिफ़ॉल्ट करने वाली कंपनी को बचाने या बेचने की समयबद्ध प्रक्रिया है। आदेश के अनुसार, 180 दिन की अवधि 29 जनवरी 2024 को खत्म हुई, न कोई विस्तार मांगा गया और न कोई समाधान योजना आई।
आदेश में दर्ज है कि समाधान पेशेवर ने पाया कि जलगांव ज़िले में कंपनी के तीन प्लॉट उसके निलंबित निदेशकों ने सितंबर और अक्टूबर 2023 में, यानी प्रक्रिया शुरू होने के बाद, बेचे थे। बिक्री विलेखों में 7,15,000 रुपये दर्ज थे, जबकि निदेशकों ने कहा कि संपत्ति 34,00,000 रुपये में बिकी; आदेश के अनुसार इससे संकेत मिलता है कि संपत्तियां कम कीमत पर बेची गई हो सकती हैं। संस्था ने 12 जनवरी 2024 को 7,15,000 रुपये कंपनी के खाते में लौटा दिए।
लेनदारों की समिति ने समाधान पेशेवर को परिसमापन की इच्छा बताई, पर कोई औपचारिक प्रस्ताव पारित नहीं किया। न्यायाधिकरण ने माना कि कोई योजना न आने के कारण दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता की धारा 33(1) लागू होती है और परिसमापन का आदेश दिया। संहिता में 2026 के संशोधन के तहत उसने भारतीय दिवाला एवं शोधन अक्षमता बोर्ड (IBBI) के पैनल से एक परिसमापक नियुक्त किया।
इसका क्या मतलब है
परिसमापन का मतलब है कि कंपनी की संपत्तियां बेचकर रकम संहिता में तय क्रम से लेनदारों में बांटी जाएगी। परिसमापन का आदेश धोखाधड़ी या कुप्रबंधन का निष्कर्ष नहीं है। न्यायाधिकरण ने परिसमापक को सभी संपत्तियां अपने नियंत्रण में लेने और, यदि कोई हो, तो संदिग्ध लेनदेन या धोखाधड़ीपूर्ण या गलत कारोबार से जुड़ी कार्यवाही जारी रखने या शुरू करने का निर्देश दिया। कंपनी के खिलाफ़ कानूनी कार्रवाई पर नई मोहलत (मोरेटोरियम) शुरू होगी, और यह आदेश कंपनी के अधिकारियों, कर्मचारियों और कामगारों के लिए सेवामुक्ति का नोटिस माना जाएगा। परिसमापक को सार्वजनिक घोषणा करनी होगी और 30 दिन में प्रारंभिक रिपोर्ट देनी होगी। इस आदेश के खिलाफ़ राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) में अपील की जा सकती है।
स्रोत: NCLT order
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