कंपनी मामले
NCLT मुंबई ने पुणे की कंपनी शितोले टिश्यू कल्चर के परिसमापन का आदेश दिया
आदेश के अनुसार, NCLT की मुंबई पीठ ने 22 अक्टूबर 2026 को शितोले टिश्यू कल्चर प्राइवेट लिमिटेड के परिसमापन का आदेश दिया, क्योंकि दिवाला प्रक्रिया में कोई समाधान योजना नहीं आई।
राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) की मुंबई पीठ ने पुणे में पंजीकृत कंपनी शितोले टिश्यू कल्चर प्राइवेट लिमिटेड के परिसमापन (लिक्विडेशन) का आदेश दिया है। 22 अक्टूबर 2026 को सुनाया गया यह आदेश तब आया जब कंपनी की दिवाला प्रक्रिया में कोई समाधान योजना नहीं मिली। कंपनी की एकमात्र वित्तीय लेनदार, जनसेवा सहकारी बैंक लिमिटेड, का 8,41,52,298.80 रुपये का दावा स्वीकार किया गया था।
क्या हुआ
आदेश के अनुसार, न्यायाधिकरण ने जनसेवा सहकारी बैंक की दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (IBC) की Section 7 के तहत दायर याचिका पर 20 जनवरी 2025 को कंपनी को कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया में शामिल किया था। आदेश में दर्ज है कि समाधान पेशेवर ने जून और जुलाई 2025 में दो बार बोलियां आमंत्रित कीं, लेकिन कोई रुचि पत्र नहीं मिला।
समाधान पेशेवर ने न्यायाधिकरण को बताया कि कंपनी के पास कोई अचल संपत्ति नहीं है, उसकी संपत्तियां बैंक ने SARFAESI Act के तहत कब्जे में ले ली थीं, और दो पंजीकृत मूल्यांकनकर्ताओं ने उसके संयंत्र और मशीनरी का परिसमापन मूल्य लगभग 2.1 लाख से 2.2 लाख रुपये आंका। 31 अक्टूबर 2025 की बैठक में लेनदारों की समिति, जिसमें केवल यह बैंक था, ने 100% मत से कंपनी के परिसमापन का फैसला किया।
न्यायाधिकरण ने माना कि यह मत Section 33(2) के तहत जरूरी न्यूनतम 66% की शर्त पूरी करता है और लेनदारों का व्यावसायिक निर्णय न्यायिक हस्तक्षेप के दायरे में नहीं है। संशोधित Section 34 के तहत समाधान पेशेवर उसी कंपनी का परिसमापक नहीं बन सकता, इसलिए न्यायाधिकरण ने IBBI की सिफारिश की शर्त पर एक अन्य दिवाला पेशेवर को 12 महीने के लिए 1 लाख रुपये मासिक शुल्क पर परिसमापक नियुक्त किया।
इसका क्या मतलब है
परिसमापन का अर्थ है कि कंपनी की संपत्तियां बेची जाएंगी और रकम कानून में तय क्रम से लेनदारों में बांटी जाएगी। यह धोखाधड़ी या कुप्रबंधन का निष्कर्ष नहीं है। परिसमापक संपत्तियों का नियंत्रण लेगा, कंपनी के परिसमापन में होने की सार्वजनिक घोषणा जारी करेगा और 30 दिनों के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट दाखिल करेगा। एक नया मोरेटोरियम शुरू होगा, और यह आदेश कंपनी के अधिकारियों, कर्मचारियों और कामगारों के लिए सेवामुक्ति का नोटिस माना जाएगा।
लेनदार, कर्मचारी और कामगार परिसमापक की सार्वजनिक घोषणा पर नजर रखें, जिसमें दावे दाखिल करने का तरीका बताया जाएगा। NCLT के इस आदेश के खिलाफ राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) में अपील की जा सकती है।
स्रोत: NCLT order
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