कंपनी मामले
नाकाम कर्ज समझौते के बाद NCLT मुंबई ने S&T इंटीरियर्स को दिवाला प्रक्रिया में भेजा
NCLT की मुंबई पीठ ने 23 अक्टूबर 2026 को 38.84 करोड़ रुपये के दावे पर एसेट्स केयर एंड रिकंस्ट्रक्शन एंटरप्राइज की याचिका पर S&T इंटीरियर्स को दिवाला प्रक्रिया में स्वीकार किया।
राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) की मुंबई पीठ ने 23 अक्टूबर 2026 को मुंबई की कंपनी S&T इंटीरियर्स एंड कॉन्ट्रैक्टिंग सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) में स्वीकार कर लिया। दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (IBC) की धारा 7 के तहत यह याचिका एसेट्स केयर एंड रिकंस्ट्रक्शन एंटरप्राइज लिमिटेड ने दायर की थी, जो एक एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी है और ACRE-144-ट्रस्ट की ट्रस्टी के रूप में काम कर रही है। याचिका में 15 जुलाई 2024 तक 38.84 करोड़ रुपये की चूक का दावा किया गया था।
क्या हुआ
आदेश के अनुसार कंपनी ने 2017 से स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक से फंड आधारित और गैर-फंड आधारित सुविधाएं लीं, जिन्हें बाद में बढ़ाकर 43.50 करोड़ रुपये किया गया। चूक के बाद बैंक ने 2021 में दिवाला याचिका दायर की। उस मामले के दौरान फरवरी 2023 में दोनों पक्षों ने समझौता किया, जिसके तहत कंपनी पूरे और अंतिम निपटारे के रूप में 6 करोड़ रुपये चुकाने पर राजी हुई। आदेश के अनुसार कंपनी ने 1.20 करोड़ रुपये की पहली किस्त चुकाई और बैंक ने याचिका वापस ले ली, लेकिन 16 मई 2023 तक देय 4.80 करोड़ रुपये की दूसरी किस्त नहीं चुकाई गई।
बैंक ने नवंबर 2023 में यह कर्ज एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी को सौंप दिया। मार्च 2024 में नए लेनदार ने समझौता रद्द कर पूरा बकाया वापस मांगा। कंपनी ने अन्य बातों के साथ यह दलील दी कि चूक उस अवधि में हुई जब कानून नए दिवाला मामलों पर रोक लगाता था (धारा 10A)। न्यायाधिकरण ने इसे खारिज करते हुए कहा कि चूक उस अवधि के बाद भी जारी रही और कंपनी ने खुद एक विवाद टिप्पणी में माना था कि 4.5 करोड़ रुपये अभी बकाया हैं।
न्यायाधिकरण ने IBC की धारा 14 के तहत मोरेटोरियम घोषित किया, एक अंतरिम समाधान पेशेवर नियुक्त किया, और लेनदार को शुरुआती खर्च के लिए 5 लाख रुपये जमा करने का निर्देश दिया।
इसका क्या मतलब है
दिवाला प्रक्रिया में स्वीकार किया जाना धोखाधड़ी या कुप्रबंधन का निष्कर्ष नहीं है। बोर्ड के अधिकार अंतरिम समाधान पेशेवर के पास चले जाते हैं, और प्रक्रिया के दौरान कंपनी के खिलाफ मुकदमों और उसकी संपत्ति की बिक्री पर रोक रहती है।
न्यायाधिकरण ने प्रक्रिया की सार्वजनिक घोषणा तुरंत करने का आदेश दिया है। जिन लेनदारों, सप्लायरों और कर्मचारियों का पैसा बकाया है, वे उस घोषणा पर नजर रखें, जिसमें दावे दाखिल करने का तरीका और आखिरी तारीख बताई जाएगी। इस आदेश के खिलाफ राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) में अपील की जा सकती है।
स्रोत: NCLT order
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