कंपनी मामले
NCLT कोलकाता ने 1.15 करोड़ रुपये के दावे पर शेविन कैपिटल सर्विसेज को दिवाला प्रक्रिया में भेजा
NCLT की कोलकाता बेंच ने 3 नवंबर 2026 को एक कर्जदाता के 1.15 करोड़ रुपये के दावे पर शेविन कैपिटल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को दिवाला प्रक्रिया में स्वीकार किया और कंपनी की यह दलील नहीं मानी कि रकम कर्ज नहीं थी।
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की कोलकाता बेंच ने 3 नवंबर 2026 को शेविन कैपिटल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया में स्वीकार कर लिया। यह आदेश आर्यन माइनिंग एंड ट्रेडिंग कॉरपोरेशन प्राइवेट लिमिटेड की अर्जी पर आया, जिसने ब्याज समेत 1,14,76,223 रुपये (करीब 1.15 करोड़ रुपये) बकाया होने का दावा किया था।
क्या हुआ
आदेश के अनुसार, अर्जी देने वाली कंपनी ने कहा कि उसने 17 जनवरी 2017 को कारोबार बढ़ाने के लिए शेविन कैपिटल सर्विसेज को 75 लाख रुपये उधार दिए थे, शुरुआत में 9% सालाना ब्याज पर। उसने बैंक स्टेटमेंट, 1 अप्रैल 2017 के खाता पुष्टि पत्र जिसमें 76,23,164 रुपये बकाया माने गए थे, अप्रैल 2018 से अप्रैल 2024 के बीच आंशिक भुगतान दिखाने वाले टैक्स रिकॉर्ड और एक इन्फॉर्मेशन यूटिलिटी के डिफॉल्ट रिकॉर्ड का सहारा लिया। उसने 17 जून 2025 को मांग नोटिस भेजा।
शेविन कैपिटल सर्विसेज ने अर्जी का विरोध किया। उसका कहना था कि 75 लाख रुपये कर्ज नहीं थे, बल्कि कोलकाता के उन दो फ्लैटों के सिलसिले में और उनके इंटीरियर के लिए दिए गए थे जिन्हें खरीदने पर अर्जी देने वाली कंपनी सहमत हुई थी, और कोई कर्ज समझौता या तय ब्याज नहीं था। उसने रकम, डिफॉल्ट की तारीख और समय-सीमा पर भी सवाल उठाए और कहा कि वह सक्षम और चालू कंपनी है।
ट्रिब्यूनल ने अर्जी स्वीकार कर ली। अपने आदेश में उसने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया कि अर्जी स्वीकार करने के चरण में ट्रिब्यूनल को सिर्फ यह देखना होता है कि कर्ज मौजूद है और डिफॉल्ट हुआ है, और यह प्रक्रिया संक्षिप्त होती है। उसने एक अंतरिम रिज़ॉल्यूशन प्रोफेशनल नियुक्त किया, मोरेटोरियम घोषित किया और तीन दिन के भीतर सार्वजनिक घोषणा का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 10 दिसंबर 2026 को है।
इसका क्या मतलब है
दिवाला प्रक्रिया में स्वीकार किया जाना धोखाधड़ी या कुप्रबंधन का निष्कर्ष नहीं है। मोरेटोरियम के दौरान कंपनी के खिलाफ मुकदमे, वसूली और जमानत पर कार्रवाई रुकी रहेगी, और प्रबंधन अंतरिम रिज़ॉल्यूशन प्रोफेशनल के पास होगा। कंपनी के लेनदार, कर्मचारी और आपूर्तिकर्ता सार्वजनिक घोषणा पर नज़र रखें और उसमें तय समय में अपने दावे दाखिल करें। इस आदेश के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल में अपील की जा सकती है।
स्रोत: NCLT order
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