कंपनी मामले
NCLT कोलकाता ने SIDBI की याचिका पर रांची की मातापेश्वरी मीडिया को दिवाला प्रक्रिया में डाला
NCLT की कोलकाता पीठ ने 16 अक्टूबर 2026 को SIDBI की याचिका पर लगभग 2.6 करोड़ रुपये के कथित बकाये को लेकर मातापेश्वरी मीडिया एंड पब्लिकेशन प्राइवेट लिमिटेड को दिवाला प्रक्रिया में शामिल किया।
राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) की कोलकाता पीठ ने रांची स्थित कंपनी मातापेश्वरी मीडिया एंड पब्लिकेशन प्राइवेट लिमिटेड को कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया में शामिल कर लिया है। 16 अक्टूबर 2026 का यह आदेश भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) की याचिका पर आया, जिसने 10 जून 2025 तक 2,60,22,283 रुपये बकाया होने का दावा किया था।
क्या हुआ
आदेश के अनुसार, SIDBI ने 21 सितंबर 2023 को अपनी 4E (एंड टू एंड एनर्जी एफिशिएंसी) फाइनेंसिंग स्कीम के तहत कंपनी को 3.98 करोड़ रुपये का टर्म लोन मंजूर किया था, जो नवंबर और दिसंबर 2023 में चार किस्तों में दिया गया। SIDBI ने न्यायाधिकरण को बताया कि 10 जून 2025 तक मासिक भुगतान नियमित रहे, उसके बाद कंपनी ने डिफॉल्ट किया, और 8 सितंबर 2025 को खाते को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) घोषित किया गया।
आदेश के अनुसार, SIDBI ने बकाया किस्तों को कंपनी की सावधि जमाओं से समायोजित किया, 17 अक्टूबर 2025 को लोन वापसी नोटिस और 12 दिसंबर 2025 को SARFAESI Act की Section 13(2) के तहत नोटिस जारी किया। कंपनी न्यायाधिकरण के सामने पेश नहीं हुई, और मामला एकपक्षीय, यानी उसकी अनुपस्थिति में, चला।
न्यायाधिकरण ने कर्ज डिफॉल्ट दर्ज करने वाली सूचना उपयोगिता NeSL के पास दाखिल डिफॉल्ट रिकॉर्ड पर भरोसा किया, जिसमें 2,52,59,613 रुपये का कर्ज दिखाया गया था। आदेश के अनुसार, कंपनी ने उस रिकॉर्ड पर आपत्ति नहीं की, इसलिए उसे प्रमाणित माना गया। न्यायाधिकरण ने माना कि डिफॉल्ट 1 करोड़ रुपये की सीमा से अधिक है, आवेदन पूरा है और प्रस्तावित अंतरिम समाधान पेशेवर के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित नहीं है, और याचिका स्वीकार कर ली।
इसका क्या मतलब है
दिवाला प्रक्रिया में शामिल किया जाना धोखाधड़ी या कुप्रबंधन का निष्कर्ष नहीं है। दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता की Section 14 के तहत मोरेटोरियम अब कंपनी के खिलाफ मुकदमों, उसकी संपत्तियों की बिक्री और सुरक्षा हित लागू करने पर रोक लगाता है। आदेश में कहा गया है कि मोरेटोरियम कंपनी के कर्ज के गारंटरों पर लागू नहीं होता।
अब कंपनी का प्रबंधन संभाल रहे अंतरिम समाधान पेशेवर को तीन दिनों के भीतर दावे आमंत्रित करते हुए सार्वजनिक घोषणा करनी है। लेनदार, कर्मचारी और आपूर्तिकर्ता उस घोषणा पर नजर रखें, जिसमें दावे दाखिल करने का तरीका और समय सीमा बताई जाएगी। NCLT के इस आदेश के खिलाफ राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) में अपील की जा सकती है।
स्रोत: NCLT order
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