कंपनी मामले
NCLT दिल्ली ने 5.4 करोड़ रुपये का एडवांस न लौटाने पर क्वासर इंडिया को दिवाला प्रक्रिया में भेजा
NCLT की नई दिल्ली बेंच ने 31 अक्टूबर 2026 को क्वासर इंडिया लिमिटेड को दिवाला प्रक्रिया में स्वीकार किया। ट्रिब्यूनल ने माना कि कंपनी ने एक खरीदार को न माल दिया, न 5.39 करोड़ रुपये का एडवांस लौटाया।
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की नई दिल्ली बेंच ने 31 अक्टूबर 2026 को क्वासर इंडिया लिमिटेड को कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया में स्वीकार कर लिया। यह आदेश बिकिट प्राइवेट लिमिटेड की अर्जी पर आया, जिसने कृषि माल के लिए 5,39,50,000 रुपये का एडवांस दिया था। ट्रिब्यूनल ने पाया कि यह माल न तो दिया गया और न ही एडवांस लौटाया गया।
क्या हुआ
आदेश के अनुसार, दोनों कंपनियों ने 25 जून 2024 को 15 करोड़ रुपये के कृषि और संबंधित माल की आपूर्ति के लिए समझौता ज्ञापन किया। बिकिट ने 29 जून से 1 जुलाई 2024 के बीच तीन किस्तों में एडवांस दिया। माल 30 अगस्त 2024 तक देना था। बिकिट ने 9 सितंबर 2024 को रिफंड मांगा, और ट्रिब्यूनल ने माना कि डिफॉल्ट 25 सितंबर 2024 से शुरू हुआ। बिकिट ने एडवांस और 12% ब्याज मिलाकर कुल 6,14,52,745 रुपये का दावा किया।
क्वासर इंडिया ने दलील दी कि खरीदार ने 20% की अगली किस्त नहीं दी, कि दोनों पक्षों में पहले से विवाद था, और कि यह असल में वसूली का मामला है। ट्रिब्यूनल ने ये दलीलें खारिज कर दीं। उसने कहा कि अगली किस्त पहली खेप की डिलीवरी पर ही देय थी, जो कभी हुई ही नहीं। ट्रिब्यूनल ने नोट किया कि अगस्त और अक्टूबर 2024 के पत्रों में कंपनी ने देरी के लिए माफी मांगी थी और एडवांस लौटाने की अपनी जिम्मेदारी मानी थी, और इसके लिए आपूर्तिकर्ताओं की चूक और नकदी की तंगी को कारण बताया था। ट्रिब्यूनल ने कहा कि आपूर्ति अनुबंध के तहत दिया गया एडवांस लौटाने का दावा ऑपरेशनल कर्ज है। ब्याज समेत सटीक दावे की जांच प्रक्रिया के दौरान होगी।
ट्रिब्यूनल ने एक अंतरिम रिज़ॉल्यूशन प्रोफेशनल नियुक्त किया और मोरेटोरियम घोषित किया।
इसका क्या मतलब है
दिवाला प्रक्रिया में स्वीकार किया जाना धोखाधड़ी या कुप्रबंधन का निष्कर्ष नहीं है। मोरेटोरियम के तहत कंपनी के खिलाफ मुकदमे, वसूली और जमानत पर कार्रवाई रुकी रहेगी, और कंपनी का प्रबंधन अंतरिम रिज़ॉल्यूशन प्रोफेशनल के पास चला गया है, जिन्हें दावे मंगाने के लिए सार्वजनिक घोषणा करनी है। क्वासर इंडिया के लेनदार, कर्मचारी और आपूर्तिकर्ता उस घोषणा पर नज़र रखें और तय समय में अपने दावे दाखिल करें। इस आदेश के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल में अपील की जा सकती है।
स्रोत: NCLT order
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