कंपनी मामले
NCLT दिल्ली ने Indian Bank की याचिका पर Mahamaya Exports को दिवाला प्रक्रिया में भेजा
NCLT की नई दिल्ली बेंच ने 16 अक्टूबर 2026 को ABW Infrastructure के कर्जों के लिए दी गई कॉरपोरेट गारंटी पर Indian Bank की याचिका पर Mahamaya Exports को दिवाला प्रक्रिया में शामिल किया।
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की नई दिल्ली बेंच ने 16 अक्टूबर 2026 को Indian Bank की याचिका पर Mahamaya Exports Private Limited को कॉरपोरेट इन्सॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (दिवाला समाधान प्रक्रिया) में शामिल कर लिया। बैंक का मामला उन कॉरपोरेट गारंटियों पर आधारित है जो Mahamaya ने ABW Infrastructure Limited के कर्जों के लिए दी थीं, और दो टर्म लोन पर 21,99,97,847 रुपये का मूलधन बकाया होने का दावा है।
क्या हुआ
आदेश के अनुसार, Indian Bank (पहले Allahabad Bank) ने 2010 से 2014 के बीच ABW Infrastructure को कर्ज दिए, और Mahamaya Exports ने इन सुविधाओं की गारंटी दी। कर्जदार कंपनी को 29 सितंबर 2016 को नॉन-परफॉर्मिंग एसेट घोषित किया गया और बैंक ने अक्टूबर 2016 में मांग नोटिस जारी किया। ABW Infrastructure को खुद सितंबर 2019 में दिवाला प्रक्रिया में शामिल किया गया था।
बैंक ने शुरू में 31,37,63,847 रुपये का दावा किया था, लेकिन समाप्त हो चुकी बैंक गारंटियां हटाने के बाद दावा घटाकर 22,19,97,847 रुपये कर दिया। Mahamaya की दलील थी कि उसे कोई पैसा नहीं मिला, बैंक पहले से ही कर्जदार की दिवाला प्रक्रिया में दावा कर रहा है, और याचिका देर से दाखिल की गई।
ट्रिब्यूनल ने माना कि कर्ज की गारंटी वित्तीय ऋण है, भले ही गारंटर को कोई पैसा न मिला हो, और कर्जदाता के लिए पहले कर्जदार से वसूली के सारे रास्ते आजमाना जरूरी नहीं है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि 26 फरवरी 2020 को दाखिल याचिका समय सीमा के भीतर है, क्योंकि कर्जदार ने 27 फरवरी 2017 के पत्र में अपनी देनदारी स्वीकार की थी। दोहरी वसूली रोकने के लिए, कर्जदार की दिवाला प्रक्रिया में बैंक को मिलने वाली कोई भी राशि समायोजित करनी होगी। ट्रिब्यूनल ने बैंक पर खर्च लगाने की Mahamaya की मांग खारिज कर दी।
NCLT ने एक अंतरिम रेजोल्यूशन प्रोफेशनल नियुक्त किया, तीन दिन के भीतर सार्वजनिक घोषणा का आदेश दिया और इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड की Section 14 के तहत मोरेटोरियम घोषित किया, जिसके दौरान मुकदमों, वसूली की कार्रवाई और कंपनी की संपत्ति बेचने पर रोक रहेगी।
इसका क्या मतलब है
ट्रिब्यूनल के तर्क के अनुसार, जो कंपनियां किसी दूसरी फर्म के बैंक कर्ज की गारंटी देती हैं, कर्जदार के डिफॉल्ट करने पर उन्हें भी दिवाला प्रक्रिया में भेजा जा सकता है। दिवाला प्रक्रिया में शामिल होना धोखाधड़ी या कुप्रबंधन का निष्कर्ष नहीं है।
Mahamaya Exports के लेनदारों को अंतरिम रेजोल्यूशन प्रोफेशनल की सार्वजनिक घोषणा पर नजर रखनी चाहिए, जिसमें दावे दाखिल करने का तरीका और अंतिम तारीख बताई जाएगी। NCLT के आदेश के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) में अपील की जा सकती है।
स्रोत: NCLT order
यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।