कंपनी मामले
NCLT ने सनब्लिंक रियल एस्टेट के लिए 143 करोड़ रुपये की समाधान योजना मंज़ूर की
NCLT की मुंबई बेंच ने सनब्लिंक रियल एस्टेट के लिए 143 करोड़ रुपये की समाधान योजना मंज़ूर की, जो इसके इकलौते कर्ज़दाता के 4,018.60 करोड़ रुपये के स्वीकृत दावे का लगभग 3.56% है।

फ़ोटो: Anurupa Chowdhury / Wikimedia Commons, CC BY 3.0 (क्रॉप की गई)। सांकेतिक तस्वीर।
राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) की मुंबई बेंच ने 3 नवंबर 2026 को दिवाला प्रक्रिया से गुज़र रही कंपनी सनब्लिंक रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड के लिए अशदान प्रॉपर्टीज़ प्राइवेट लिमिटेड की समाधान योजना को मंज़ूरी दी। योजना में कंपनी के इकलौते सुरक्षित कर्ज़दाता, पीरामल कैपिटल एंड हाउसिंग फाइनेंस, को 4,018.60 करोड़ रुपये के स्वीकृत दावे के बदले 143 करोड़ रुपये दिए जाएंगे, यानी लगभग 3.56%।
क्या हुआ
न्यायाधिकरण ने 22 जनवरी 2025 को सनब्लिंक रियल एस्टेट को कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) में लिया था। यह डिफ़ॉल्ट करने वाली कंपनी को बचाने या बेचने की कानूनी प्रक्रिया है। आदेश के अनुसार, यह कदम पीरामल कैपिटल एंड हाउसिंग फाइनेंस की याचिका पर उठाया गया था, जो 30 नवंबर 2023 तक 845.81 करोड़ रुपये के डिफ़ॉल्ट से जुड़ी थी। कर्ज़दाता लेनदारों की समिति का एकमात्र सदस्य था, जिसने 4 सितंबर 2026 को 100% वोट से योजना मंज़ूर की।
योजना के तहत कर्ज़दाता को 25 करोड़ रुपये नकद और 118 करोड़ रुपये के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर मिलेंगे। नकद राशि तीन हिस्सों में मिलेगी: न्यायाधिकरण की मंज़ूरी के सात दिन के भीतर 5 करोड़ रुपये, 30 दिन के भीतर 10 करोड़ रुपये और 90 दिन के भीतर 10 करोड़ रुपये। आदेश में दर्ज है कि चिह्नित संपत्तियों का औसत उचित मूल्य 8.635 करोड़ रुपये और परिसमापन मूल्य 5.18 करोड़ रुपये आंका गया था, और योजना की राशि दोनों से काफ़ी अधिक है। 23 संभावित बोलीदाताओं में से केवल दो ने समय पर अग्रिम राशि के साथ योजनाएं जमा कीं।
न्यायाधिकरण ने माना कि योजना दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता की धारा 30(2) की शर्तें पूरी करती है और धारा 29A का उल्लंघन नहीं करती, जो कुछ लोगों को बोली लगाने से रोकती है। कर्ज़दाता, खरीदार और समाधान पेशेवर की एक निगरानी समिति योजना के अमल पर नज़र रखेगी।
इसका क्या मतलब है
यह आदेश कंपनी, उसके लेनदारों, कर्मचारियों, गारंटरों और सरकारी प्राधिकरणों पर बाध्यकारी है। योजना से बाहर के दावे समाप्त हो गए हैं, और कंपनी को कानूनी कार्रवाई से बचाने वाली मोहलत (मोरेटोरियम) आदेश की तारीख से खत्म हो गई। न्यायाधिकरण ने निर्देश दिया कि कंपनी पर लगे "NPA" या "डिफ़ॉल्ट" जैसे नकारात्मक क्रेडिट टैग मंज़ूरी की तारीख से हटाए जाएं। योजना में कर या अन्य प्राधिकरणों से मांगी गई कोई भी छूट उनकी मंज़ूरी पर निर्भर रहेगी। योजना की तालिका में ऑपरेशनल लेनदारों, कर्मचारियों या शेयरधारकों के लिए कोई भुगतान नहीं दिखाया गया है; प्रक्रिया में केवल कर्ज़दाता का दावा आया था। न्यायाधिकरण के आदेश के खिलाफ़ राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) में अपील की जा सकती है।
स्रोत: NCLT order
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