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कंपनी मामले

NCLT इलाहाबाद ने NBFC कर्जदाता की अर्जी पर सिबली इंडस्ट्रीज को दिवाला प्रक्रिया में भेजा

NCLT की इलाहाबाद बेंच ने 27 अक्टूबर 2026 को NBFC सीतल लीजिंग एंड फाइनेंस की अर्जी पर 1.5 करोड़ रुपये के असुरक्षित कर्ज के मामले में सिबली इंडस्ट्रीज लिमिटेड को दिवाला प्रक्रिया में स्वीकार किया।

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आधिकारिक स्रोतNational Company Law Tribunal
कंपनी मामले / 4 नवंबर 2026

नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की प्रयागराज स्थित इलाहाबाद बेंच ने 27 अक्टूबर 2026 को गाज़ियाबाद के मुरादनगर की कंपनी सिबली इंडस्ट्रीज लिमिटेड को कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया में स्वीकार कर लिया। यह आदेश गैर-बैंकिंग वित्त कंपनी सीतल लीजिंग एंड फाइनेंस लिमिटेड की अर्जी पर आया, जिसने एक कर्ज पर 1,63,49,258 रुपये का डिफॉल्ट होने का दावा किया था।

क्या हुआ

आदेश के अनुसार, सिबली इंडस्ट्रीज ने सितंबर 2024 में 2 करोड़ रुपये का कर्ज मांगा था, और कर्जदाता ने 12% सालाना ब्याज पर 1.5 करोड़ रुपये का असुरक्षित टर्म लोन मंजूर किया, जो 12 मासिक किस्तों में चुकाना था। रकम 26 सितंबर 2024 को दी गई। कर्जदाता के मुताबिक, 3 अक्टूबर 2024 को 22,192 रुपये के ब्याज भुगतान के अलावा कंपनी ने 26 अक्टूबर से 26 दिसंबर 2024 तक की पहली तीन किस्तें नहीं चुकाईं।

कर्जदाता ने 15 जनवरी 2025 को कर्ज वापस मांगते हुए 1,54,74,904 रुपये की मांग की। इसके बाद 20 फरवरी 2025 को दोनों पक्षों ने एक सेटलमेंट समझौता किया, जिसमें कंपनी ने यह रकम 20 जून 2025 तक एकमुश्त चुकाने का वादा किया। कोई भुगतान नहीं हुआ, और कर्जदाता ने सेटलमेंट को खत्म मान लिया।

सिबली इंडस्ट्रीज ने अर्जी का विरोध किया। उसका कहना था कि यह वसूली की कोशिश है, कि ग्राहकों से मिलने वाली रकम में देरी के कारण उसे और समय चाहिए, और कि उसने लंबे पुनर्गठन के वादे पर दबाव में सेटलमेंट पर दस्तखत किए थे। ट्रिब्यूनल ने पाया कि वित्तीय कर्ज और डिफॉल्ट दोनों साबित हैं और अर्जी समय-सीमा के भीतर है, और उसे स्वीकार कर लिया। उसने एक अंतरिम रिज़ॉल्यूशन प्रोफेशनल नियुक्त किया और मोरेटोरियम घोषित किया। मामले की अगली सुनवाई 1 दिसंबर 2026 को है।

इसका क्या मतलब है

दिवाला प्रक्रिया में स्वीकार किया जाना धोखाधड़ी या कुप्रबंधन का निष्कर्ष नहीं है। मोरेटोरियम के दौरान कंपनी के खिलाफ मुकदमे, वसूली और जमानत पर कार्रवाई रुकी रहेगी, और उसका बोर्ड निलंबित रहेगा, जबकि प्रबंधन अंतरिम रिज़ॉल्यूशन प्रोफेशनल के पास होगा। उन्हें दावे मंगाने के लिए सार्वजनिक घोषणा करनी है; लेनदार, कर्मचारी और आपूर्तिकर्ता उसमें तय समय में दावा दाखिल करें। इस आदेश के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल में अपील की जा सकती है।

स्रोत: NCLT order

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।