कंपनी मामले
गारंटी डिफॉल्ट पर NCLT ने स्टैंडर्ड फार्मास्युटिकल के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया शुरू की
NCLT कोलकाता पीठ ने 30 अक्टूबर 2026 को जेएम फाइनेंशियल ARC की अर्जी पर स्टैंडर्ड फार्मास्युटिकल के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया शुरू की। ARC ने गारंटी के तहत 95.16 करोड़ रुपये का दावा किया था।

फ़ोटो: BuhaM / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0 (क्रॉप की गई)। सांकेतिक तस्वीर।
राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) की कोलकाता पीठ ने 30 अक्टूबर 2026 के आदेश में स्टैंडर्ड फार्मास्युटिकल लिमिटेड के खिलाफ कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू करने की अर्जी मंजूर कर ली है। न्यायाधिकरण ने जेएम फाइनेंशियल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड की अर्जी स्वीकार की, जिसका कहना था कि एक दूसरी कंपनी के कर्ज की गारंटर होने के नाते स्टैंडर्ड फार्मास्युटिकल पर 31 अक्टूबर 2023 तक उसके 95.16 करोड़ रुपये बकाया थे।
क्या हुआ
आदेश के मुताबिक, फेडरल बैंक ने एचआर इंटरनेशनल लिमिटेड नाम की कंपनी को कर्ज दिया था, और स्टैंडर्ड फार्मास्युटिकल ने उसके लिए कॉरपोरेट गारंटी दी थी और अपनी संपत्ति गिरवी रखी थी। 28 सितंबर 2015 की यह गारंटी 7.41 करोड़ रुपये या गिरवी संपत्ति के 400 कट्ठा के बाजार मूल्य, जो भी ज्यादा हो, तक के लिए थी। कर्ज लेने वाली कंपनी के खाते 31 दिसंबर 2015 को एनपीए घोषित हुए, और फेडरल बैंक ने 30 मार्च 2016 को ये कर्ज जेएम फाइनेंशियल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी को सौंप दिए।
आदेश में दर्ज है कि 2017 में कर्ज का पुनर्गठन हुआ, बाद में कर्ज लेने वाली कंपनी ने डिफॉल्ट किया, और एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी ने 15 फरवरी 2023 के पत्र से स्टैंडर्ड फार्मास्युटिकल की गारंटी लागू की। समझौते की बातचीत नाकाम रही।
स्टैंडर्ड फार्मास्युटिकल ने दलील दी कि 2017 में हुए समझौतों से वह गारंटी की जिम्मेदारी से मुक्त हो गई थी और अर्जी समय-सीमा से बाहर है। न्यायाधिकरण ने कहा कि बाद के दस्तावेजों से गारंटी खत्म नहीं हुई और 1 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा का डिफॉल्ट साबित हुआ है। उसने याचिका स्वीकार कर ली और कंपनी की अपनी अर्जी गुण-दोष के आधार पर खारिज कर दी।
इसका क्या मतलब है
एक अंतरिम समाधान पेशेवर नियुक्त किया गया है, जो अब कंपनी का कामकाज संभालेगा और दावे मंगाने के लिए सार्वजनिक घोषणा करेगा। कंपनी पर मोरेटोरियम लागू हो गया है, यानी उसके खिलाफ मुकदमों, वसूली की कार्रवाई और उसकी संपत्ति की बिक्री पर रोक है। कंपनी के लेनदार, कर्मचारी और सप्लायर सार्वजनिक घोषणा पर नजर रखें, जिसमें दावे दाखिल करने की आखिरी तारीख होगी; आदेश में यह तारीख नहीं दी गई है।
दिवाला प्रक्रिया में दाखिला धोखाधड़ी या कुप्रबंधन का निष्कर्ष नहीं है। इसका मतलब है कि न्यायाधिकरण ने पाया कि कर्ज बकाया था और उसमें डिफॉल्ट हुआ। NCLT के इस आदेश के खिलाफ राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) में अपील की जा सकती है।
स्रोत: NCLT order
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