कंपनी मामले
1.57 करोड़ रुपये के कर्ज डिफॉल्ट पर NCLT ने Shital India Preservation को दिवाला प्रक्रिया में भेजा
NCLT की इलाहाबाद पीठ ने तीन कर्जदाताओं की संयुक्त याचिका पर फिरोजाबाद की Shital India Preservation Private Limited को बकाया कर्ज के मामले में दिवाला प्रक्रिया में भेज दिया है।
राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) की इलाहाबाद पीठ ने फिरोजाबाद जिले के शिकोहाबाद में पंजीकृत Shital India Preservation Private Limited के खिलाफ कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है। 26 अक्टूबर 2026 को सुनाया गया यह आदेश तीन व्यक्तिगत कर्जदाताओं की संयुक्त याचिका पर आया, जिन्होंने कहा कि कंपनी ने कुल 1,57,46,699 रुपये के कर्ज में डिफॉल्ट किया है।
क्या हुआ
दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता के तहत वित्तीय लेनदार इन कर्जदाताओं ने 16 जुलाई 2025 को याचिका दायर की। आदेश के अनुसार, उनके बैंक विवरणों में मार्च 2021 में कंपनी को रकम भेजे जाने का रिकॉर्ड है, और 31 मार्च 2024 को समाप्त वर्ष की कंपनी की ऑडिटेड बैलेंस शीट में, जिस पर निदेशकों ने 7 अक्टूबर 2024 को दस्तखत किए, ये रकमें संबंधित पक्षों से लिए गए दीर्घकालिक कर्ज के रूप में दर्ज हैं।
कर्जदाताओं ने 21 जून 2025 को नोटिस भेजकर 10 दिन में भुगतान मांगा। भुगतान नहीं हुआ, और सूचना उपयोगिता National E-Governance Services Limited के डिफॉल्ट रिकॉर्ड में डिफॉल्ट की तारीख 2 जुलाई 2025 है।
कंपनी ने मामले में गुण-दोष पर जवाब नहीं दिया। आदेश के अनुसार, उसके वकील पेश हुए लेकिन कई मौके मिलने के बाद भी जवाब दाखिल नहीं किया, और 22 अप्रैल 2026 को उसका जवाब देने का अधिकार खत्म कर दिया गया। न्यायाधिकरण ने कहा कि याचिका तीन साल की समयसीमा के भीतर दायर हुई, क्योंकि निदेशकों ने बैलेंस शीट में कर्ज स्वीकार किया था, और 1 करोड़ रुपये की सीमा से ऊपर का कर्ज व डिफॉल्ट साबित होता है।
इसका क्या मतलब है
न्यायाधिकरण द्वारा नियुक्त अंतरिम समाधान पेशेवर अब कंपनी का कामकाज संभालेगा और उसे तुरंत सार्वजनिक घोषणा करके दावे मंगाने होंगे। जिस किसी का कंपनी पर पैसा बकाया है, वह उस घोषणा के निर्देशों के अनुसार दावा दाखिल करे। प्रक्रिया के दौरान मोरेटोरियम के चलते मुकदमों, वसूली और कंपनी की संपत्ति बेचने पर रोक रहेगी। कर्जदाताओं को शुरुआती खर्च के लिए 1 लाख रुपये जमा करने होंगे, और मामले की अगली सुनवाई 26 नवंबर 2026 को है।
दिवाला प्रक्रिया में भेजा जाना धोखाधड़ी या कुप्रबंधन का निष्कर्ष नहीं है। NCLT के आदेश के खिलाफ राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) में अपील की जा सकती है।
स्रोत: NCLT order
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