कंपनी मामले
NCLT ने IL&FS की सड़क कंपनी वेस्ट गुजरात एक्सप्रेसवे को दिवाला प्रक्रिया में भेजा
NCLT की मुंबई बेंच ने 2 नवंबर 2026 को IL&FS समूह की सड़क कंपनी वेस्ट गुजरात एक्सप्रेसवे लिमिटेड की अपनी अर्जी पर उसे दिवाला प्रक्रिया में स्वीकार किया। कंपनी पर करीब 227 करोड़ रुपये का कर्ज डिफॉल्ट में बताया गया है।

फ़ोटो: Ashwin Kumar from Bangalore, India / Wikimedia Commons, CC BY-SA 2.0 (क्रॉप की गई)। सांकेतिक तस्वीर।
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की मुंबई बेंच ने 2 नवंबर 2026 को IL&FS समूह की सड़क कंपनी वेस्ट गुजरात एक्सप्रेसवे लिमिटेड को कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया में स्वीकार कर लिया। कंपनी ने खुद इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड की Section 10 के तहत अर्जी दी थी और 14 जनवरी 2026 तक कुल 2,27,20,58,957.71 रुपये (करीब 227 करोड़ रुपये) का कर्ज डिफॉल्ट में बताया था।
क्या हुआ
आदेश के अनुसार, कंपनी 2005 में IL&FS ट्रांसपोर्टेशन नेटवर्क्स लिमिटेड और इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड ने बनाई थी, ताकि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग 8B के जेतपुर-गोंडल-राजकोट हिस्से को बनाओ-चलाओ-सौंपो (BOT) मॉडल पर बनाया और चलाया जा सके। NHAI ने 21 दिसंबर 2021 को समझौता खत्म करने का नोटिस दिया और 1 अप्रैल 2022 को परियोजना सौंप दी गई। तब से कंपनी का कोई खास कारोबार नहीं है।
आदेश में दर्ज है कि एक समझौते के बाद NHAI ने 4 जुलाई 2025 को कंपनी को 69.53 करोड़ रुपये दिए, और IL&FS समूह के समाधान ढांचे के तहत 10 दिसंबर 2025 को लेनदारों में 79.05 करोड़ रुपये का अंतिम वितरण पूरा हुआ। 2024-25 के ऑडिटेड खातों में कंपनी की कुल संपत्ति 85.34 करोड़ रुपये और देनदारियां 319.81 करोड़ रुपये हैं, यानी नेटवर्थ 234.47 करोड़ रुपये नकारात्मक है। आदेश के मुताबिक वरिष्ठ लेनदारों का कर्ज CFM ARC को सौंपा जा चुका है।
ट्रिब्यूनल ने कहा कि सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस की चल रही जांच दिवाला प्रक्रिया शुरू करने में बाधा नहीं है, और रिज़ॉल्यूशन प्रोफेशनल को इसका ध्यान रखने का निर्देश दिया। कंपनी की यह मांग कि भविष्य की वसूली IL&FS ढांचे के तहत बांटी जाए, ट्रिब्यूनल ने ठुकरा दी और कहा कि इससे कोड की अपनी प्रक्रिया पहले ही तय हो जाएगी।
इसका क्या मतलब है
दिवाला प्रक्रिया में स्वीकार किया जाना धोखाधड़ी या कुप्रबंधन का निष्कर्ष नहीं है। अब मोरेटोरियम लागू है, जिससे कंपनी के खिलाफ मुकदमे, वसूली और जमानत पर कार्रवाई रुक गई है। कंपनी का प्रबंधन ट्रिब्यूनल द्वारा नियुक्त अंतरिम रिज़ॉल्यूशन प्रोफेशनल के पास चला गया है, जो दावे मंगाने के लिए सार्वजनिक घोषणा करेंगे। कंपनी के लेनदारों को उस घोषणा पर नज़र रखनी चाहिए और उसमें तय समय में दावा दाखिल करना चाहिए। ट्रिब्यूनल के आदेश के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल में अपील की जा सकती है।
स्रोत: NCLT order
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