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NCLAT ने आपूर्तिकर्ता के बकाये पर श्री परमसुख एडिबल फूड्स की दिवाला प्रक्रिया बरकरार रखी

NCLAT ने एक पूर्व निदेशक की अपील खारिज कर NCLT इंदौर का वह आदेश बरकरार रखा, जिसमें सरसों बीज के एक आपूर्तिकर्ता के दावे पर श्री परमसुख एडिबल फूड्स को दिवाला प्रक्रिया में भेजा गया था।

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आधिकारिक स्रोतNational Company Law Appellate Tribunal
कानूनी / 25 अक्टूबर 2026

नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) की प्रधान पीठ, नई दिल्ली ने 14 अक्टूबर 2026 को श्री परमसुख एडिबल फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के एक पूर्व निदेशक की अपील खारिज कर दी। अपील में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), इंदौर के 11 सितंबर 2025 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें एक आपूर्तिकर्ता, मोहिनी फूड प्रोडक्ट, की अर्जी पर कंपनी को कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया में भेजा गया था। आपूर्तिकर्ता ने सरसों के बीज के लिए 1,42,46,178 रुपये और ब्याज का दावा किया था।

क्या हुआ

आदेश के अनुसार, आपूर्तिकर्ता ने 5 अगस्त 2021 से 31 अगस्त 2021 के बीच 8 बिल जारी किए थे और 20 जुलाई 2023 को इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड की धारा 9 के तहत अर्जी दी थी। यह वह रास्ता है जिससे आपूर्तिकर्ता जैसे ऑपरेशनल क्रेडिटर दिवाला प्रक्रिया शुरू करवा सकते हैं। पूर्व निदेशक की दलील थी कि माल कभी पहुंचा ही नहीं, क्योंकि बिलों और ई-वे बिलों पर गलत पिन कोड था, और कोई लिखित समझौता भी नहीं था।

NCLAT ने यह दलील नहीं मानी। उसने कहा कि कंपनी ने इन खरीदों पर आयकर अधिनियम की धारा 194Q के तहत TDS काटा था और इन्हीं 8 बिलों पर GST इनपुट टैक्स क्रेडिट भी लिया था। ट्रिब्यूनल ने माना कि इन रिकॉर्ड से साबित होता है कि माल भेजा और प्राप्त किया गया, और केवल पिन कोड के अंतर से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि माल नहीं भेजा गया। उसने यह भी दर्ज किया कि निदेशक ने माना कि कंपनी का कोई दूसरा दफ्तर या गोदाम नहीं था और माल न पहुंचने की कोई शिकायत कभी नहीं की गई।

रकम के बारे में NCLAT ने कहा कि अर्जी की तारीख पर कंपनी के अपने खाते में 1,29,33,407 रुपये बकाया दिख रहे थे, जो कोड की धारा 4 की सीमा से ऊपर है। उसने कहा कि NCLT ने हिसाब मिलान के अनुरोध को ठीक ही नहीं माना और दिवाला प्रक्रिया में भेजने का आदेश कानून के अनुसार था।

इसका क्या मतलब है

जिन आपूर्तिकर्ताओं का किसी कंपनी पर पैसा बकाया है, उनके लिए यह फैसला बताता है कि खरीदार के अपने टैक्स रिकॉर्ड, जैसे खरीद पर काटा गया TDS और बिल पर लिया गया GST इनपुट टैक्स क्रेडिट, माल पहुंचने का सबूत माने जा सकते हैं। ऐसे रिकॉर्ड मौजूद हों तो पते की छोटी गलती से दावा खारिज नहीं होता।

इसलिए NCLT का दिवाला प्रक्रिया में भेजने का आदेश कायम है। NCLAT के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की जा सकती है।

स्रोत: NCLAT order

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।