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NCLAT ने S.S. Aluminium के खिलाफ Canara Bank का दिवाला मामला बरकरार रखा, MSME दलील खारिज

NCLAT ने 2 नवंबर 2026 को Canara Bank की याचिका पर S.S. Aluminium Private Limited को दिवाला प्रक्रिया में भेजने का आदेश बरकरार रखा और कहा कि कंपनी ने समय पर MSME संरक्षण का दावा नहीं किया।

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आधिकारिक स्रोतNational Company Law Appellate Tribunal
Circular steel vault door with bolts and time locks

फ़ोटो: Joe Mabel / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0 (क्रॉप की गई)। सांकेतिक तस्वीर।

नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने 2 नवंबर 2026 को ओडिशा की कंपनी S.S. Aluminium Private Limited के एक निलंबित निदेशक की अपील खारिज कर दी और Canara Bank की याचिका पर कंपनी को दिवाला प्रक्रिया में भेजने का आदेश बरकरार रखा। आदेश के अनुसार, नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की कटक पीठ ने 9 सितंबर 2025 को लगभग 15.88 करोड़ रुपये के डिफॉल्ट के आधार पर कंपनी को दिवाला प्रक्रिया में शामिल किया था।

क्या हुआ

आदेश के अनुसार, कंपनी का कर्ज 11 मई 2021 को एनपीए घोषित हुआ। बैंक ने 17 मई 2021 को SARFAESI Act की धारा 13(2) के तहत मांग नोटिस और 4 अक्टूबर 2021 को 13.48 करोड़ रुपये के लिए रिकॉल नोटिस भेजा। आदेश में दर्ज है कि कंपनी ने तीन बार एकमुश्त समझौते (OTS) के प्रस्ताव भेजे, लेकिन कोई भुगतान नहीं किया।

निदेशक ने दलील दी कि बैंक की याचिका समय-सीमा से बाहर है और बैंक ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय की 29 मई 2015 की अधिसूचना का पालन नहीं किया, जो छोटे कारोबारों के कर्ज में शुरुआती दबाव पहचानने और सुलझाने का ढांचा तय करती है।

NCLAT ने दोनों दलीलें खारिज कीं। उसने कहा कि समझौता प्रस्तावों और 13 जुलाई 2021 को दी गई कर्ज की स्वीकृति के कारण याचिका समय-सीमा के भीतर थी। ट्रिब्यूनल ने पाया कि कंपनी का MSME दर्जा 31 मार्च 2021 को खत्म हो चुका था, उसने बैंक के मांग नोटिस का जवाब देकर इस ढांचे का लाभ कभी नहीं मांगा और यह दलील पहली बार लिखित दलीलों में उठाई। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के आधार पर उसने कहा कि सबूत के साथ इस ढांचे का दावा करने की जिम्मेदारी कारोबार की है। आदेश में दर्ज है कि एक समाधान योजना दाखिल हो चुकी है और NCLT की मंजूरी का इंतजार है।

इसका क्या मतलब है

छोटे कारोबारी कर्जदारों के लिए यह फैसला बताता है कि MSME ढांचा अपने आप लागू नहीं होता। जो कारोबार इसका संरक्षण चाहता है, उसे शुरुआत में ही दावा करना होगा: SARFAESI Act की धारा 13(3A) के तहत बैंक के धारा 13(2) वाले मांग नोटिस का जवाब देकर और MSME दर्जे के दस्तावेजों के साथ बैंक की स्ट्रेस्ड MSME समिति में आवेदन करके।

कंपनी के लेनदारों के लिए दिवाला प्रक्रिया जारी रहेगी। NCLAT के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की जा सकती है।

स्रोत: NCLAT order

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।