कानूनी
NCLAT ने गुणवत्ता विवाद के चलते MIM पेट्रो वर्ल्ड की दिवाला प्रक्रिया का आदेश रद्द किया
NCLAT ने NCLT अहमदाबाद का वह आदेश रद्द कर दिया जिसमें MIM पेट्रो वर्ल्ड को दिवाला प्रक्रिया में भेजा गया था। उसने माना कि आपूर्तिकर्ता के डिमांड नोटिस से पहले ही माल की गुणवत्ता पर विवाद मौजूद था।
नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) की प्रधान पीठ, नई दिल्ली ने 14 अक्टूबर 2026 को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), अहमदाबाद का 27 अगस्त 2026 का वह आदेश रद्द कर दिया, जिसमें MIM पेट्रो वर्ल्ड प्राइवेट लिमिटेड को कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया में भेजा गया था। यह अर्जी आपूर्तिकर्ता जय अंबे इंडस्ट्रीज ने दी थी, जिसने 1,96,00,535 रुपये का दावा किया था, जिसमें 1,77,32,898 रुपये मूल राशि और 18,67,637 रुपये ब्याज था। अपील कंपनी के निलंबित प्रबंधन ने दायर की थी।
क्या हुआ
आदेश के अनुसार, कंपनी आपूर्तिकर्ता से मिक्स्ड मिनरल हाइड्रोकार्बन ऑयल खरीदती थी, जो बिल-टू-शिप व्यवस्था में सीधे कंपनी के ग्राहकों तक पहुंचाया जाता था। कंपनी का कहना था कि नवंबर और दिसंबर 2022 में भेजा गया माल घटिया था और इससे उसके ग्राहकों के वाहन और मशीनें बंद हो गईं। आपूर्तिकर्ता ने 17 अगस्त 2023 को डिमांड नोटिस भेजा और कंपनी ने 29 अगस्त 2023 को जवाब देकर गुणवत्ता विवाद का हवाला दिया।
NCLT ने नवंबर 2024 में पहले अर्जी खारिज कर दी थी, लेकिन NCLAT द्वारा नए दस्तावेजों के लिए मामला वापस भेजे जाने के बाद अगस्त 2026 में कंपनी को दिवाला प्रक्रिया में भेज दिया। NCLAT ने कहा कि NCLT ने असल में कंपनी के बचाव की सुनवाई ट्रायल की तरह कर डाली, जबकि उसे सिर्फ यह देखना था कि कोई विश्वसनीय विवाद मौजूद है या नहीं। उसने 24 दिसंबर 2022 को लौटाए गए माल, नवंबर और दिसंबर 2022 की तस्वीरों और लैब रिपोर्ट वाली WhatsApp चैट, जिन्हें आपूर्तिकर्ता ने स्पष्ट रूप से नकारा नहीं था, और नोटिस के समय पर दिए गए जवाब को आधार बनाया।
ट्रिब्यूनल ने कहा कि कोड में अनुबंध में गुणवत्ता की शर्त होना जरूरी नहीं है, क्योंकि इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड खुद माल की गुणवत्ता को विवाद का आधार मानता है। उसने यह भी कहा कि लौटाए गए माल की मात्रा विवाद के आकार से जुड़ी है, उसके अस्तित्व से नहीं।
इसका क्या मतलब है
उधार पर माल खरीदने वाले कारोबारों के लिए यह फैसला बताता है कि आपूर्तिकर्ता के डिमांड नोटिस से पहले उठाई गई सच्ची गुणवत्ता शिकायत, अगर संदेशों, माल वापसी और समय पर दिए गए जवाब जैसे रिकॉर्ड से समर्थित हो, तो कोड की धारा 9 के तहत दिवाला मामले को रोक सकती है। NCLAT ने साफ किया कि उसने यह तय नहीं किया कि माल खराब था या कितना पैसा बकाया है; ये सवाल दूसरी कार्यवाही में तय हो सकते हैं। NCLAT के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की जा सकती है।
स्रोत: NCLAT order
यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।