कानूनी
NCLAT ने Doshion परिसमापन में कर्नाटक कर विभाग का देर से दायर GST दावा खारिज किया
NCLAT ने 29 अक्टूबर 2026 को Doshion Private Limited के परिसमापन में कर्नाटक के एक कर कार्यालय के 8.10 लाख रुपये के GST दावे को खारिज किए जाने को सही ठहराया, जो 896 दिन देर से दायर हुआ था।

फ़ोटो: Marcin Wichary from San Francisco, U.S.A. / Wikimedia Commons, CC BY 2.0 (क्रॉप की गई)। सांकेतिक तस्वीर।
राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) ने 29 अक्टूबर 2026 को Doshion Private Limited के परिसमापन (liquidation) में कर्नाटक के एक वाणिज्यिक कर कार्यालय के 8,10,000 रुपये के वस्तु एवं सेवा कर (GST) दावे को खारिज किए जाने को सही ठहराया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि दावा अंतिम तारीख के 896 दिन बाद आया और देरी का कोई पर्याप्त कारण नहीं बताया गया।
क्या हुआ
आदेश के अनुसार, राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) की अहमदाबाद बेंच ने 3 अक्टूबर 2023 को Doshion के परिसमापन का आदेश दिया था और दावों की अंतिम तारीख 8 नवंबर 2023 थी। बाद में डिप्टी कमिश्नर ऑफ कमर्शियल टैक्सेज (ऑडिट)-I, मंगलुरु ने पाया कि कंपनी ने कर्नाटक के भीतर कुछ वर्क्स कॉन्ट्रैक्ट सेवाओं पर केंद्रीय और राज्य GST के बजाय एकीकृत GST चुकाया था। 21 फरवरी 2026 के न्यायनिर्णयन आदेश में 8,10,000 रुपये की देनदारी तय की गई। कार्यालय ने 22 अप्रैल 2026 को परिसमापक के पास दावा दायर किया, जिसे परिसमापक ने 2 मई 2026 को देर से आने के कारण खारिज कर दिया। NCLT ने 22 जुलाई 2026 को देरी माफ करने की अर्जी खारिज कर दी।
NCLAT ने कहा कि परिसमापन नियमों में परिसमापक को अंतिम तारीख के बाद दावा स्वीकार करने का कोई अधिकार नहीं है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) के तहत दावा तब भी दावा होता है जब वह विवादित हो या उसकी रकम तय न हुई हो, इसलिए कार्यालय समय पर दावा दायर कर सकता था। उसने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के तहत कर अधिकारी दिवाला प्रक्रिया के दौरान बकाये का आकलन कर सकते हैं, लेकिन इससे दावा दायर करने का समय फिर से शुरू नहीं होता। ट्रिब्यूनल ने कहा कि कार्यालय को परिसमापन की जानकारी थी, और न्यायनिर्णयन पूरा होने तक इंतजार करना उसका अपना फैसला था।
इसका क्या मतलब है
ट्रिब्यूनल ने कहा कि वैधानिक लेनदार भी अन्य ऑपरेशनल लेनदारों की कतार में ही खड़ा होता है और सरकार होने के कारण उसे अधिक समय नहीं मिलता। उसने कहा कि परिसमापन के तीन साल बाद दावा स्वीकार करने से परिसमापक को सत्यापन फिर से खोलना पड़ेगा और समय पर दावा करने वाले लेनदारों के भुगतान पर असर पड़ सकता है।
परिसमापन में चल रही किसी भी कंपनी के लेनदारों के लिए यह फैसला बताता है कि दावे सार्वजनिक घोषणा में दी गई तारीख तक दायर कर देने चाहिए, भले ही रकम पर विवाद बाकी हो। NCLAT के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की जा सकती है।
स्रोत: NCLAT order
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