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NCLAT ने Vilsons Roofing दिवाला योजना में बकाया PF पर EPFO की अपील खारिज की

NCLAT ने 29 अक्टूबर 2026 को EPFO की वह अपील खारिज कर दी, जिसमें Vilsons Roofing Products की समाधान योजना से छूटे 4.56 लाख रुपये के PF बकाये की मांग थी। ट्रिब्यूनल ने कहा कि अपील देर से दायर हुई।

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आधिकारिक स्रोतNational Company Law Appellate Tribunal
A small blue piggy bank standing on a stone ledge

फ़ोटो: Dietmar Rabich / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0 (क्रॉप की गई)। सांकेतिक तस्वीर।

राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) ने 29 अक्टूबर 2026 को कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की वह अपील खारिज कर दी, जिसमें कहा गया था कि Vilsons Roofing Products Private Limited की समाधान योजना में 4,56,121 रुपये (लगभग 4.56 लाख रुपये) के भविष्य निधि (PF) बकाये का प्रावधान नहीं किया गया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि अपील उस समय-सीमा के बाद दायर हुई जिसे वह बढ़ा नहीं सकता, और गुण-दोष के आधार पर भी अपील खारिज कर दी।

क्या हुआ

कंपनी 27 अक्टूबर 2023 को दिवाला प्रक्रिया में भर्ती हुई थी। EPFO के रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने 30 मई 2024 को 13,88,701 रुपये का दावा और 9 अगस्त 2024 को 15,53,780 रुपये का संशोधित दावा दायर किया। आदेश के अनुसार, इसमें से 10,97,659 रुपये स्वीकार किए गए, 1,77,440 रुपये खारिज हुए और 2,78,681 रुपये सत्यापन में रखे गए। राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) की मुंबई बेंच ने 28 अप्रैल 2026 को समाधान योजना मंजूर की।

EPFO का तर्क था कि PF बकाया कर्मचारियों का पैसा है और इसका पूरा भुगतान होना चाहिए। NCLAT ने कहा कि दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) में अपील के लिए 30 दिन मिलते हैं, जिन्हें अधिकतम 15 दिन बढ़ाया जा सकता है। EPFO की अपील आदेश के 56 दिन बाद आई, यानी अधिकतम सीमा से 11 दिन बाद। ट्रिब्यूनल ने कहा कि समय आदेश सुनाए जाने की तारीख से गिना जाता है, न कि 10 जून 2026 से, जब EPFO के अनुसार उसे आदेश की जानकारी मिली।

गुण-दोष पर ट्रिब्यूनल ने कहा कि PF बकाये की सुरक्षा से जुड़ा कानून तय है, लेकिन EPFO यह नहीं दिखा सका कि बकाया रकम में कितना अंशदान है और कितना ब्याज या हर्जाना। ट्रिब्यूनल ने पाया कि योजना में सभी स्वीकृत PF बकाये का पूरा और अग्रिम भुगतान तय था, और EPFO प्रक्रिया के दौरान ही NCLT में अपने दावे की स्वीकृति को चुनौती दे सकता था।

इसका क्या मतलब है

योजना को NCLT की मंजूरी बरकरार है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि योजना मंजूर होने के बाद उसमें शामिल न किए गए दावे समाप्त हो जाते हैं।

दिवाला प्रक्रिया में फंसी कंपनी के लेनदारों, जिनमें सरकारी संस्थाएं भी शामिल हैं, के लिए यह आदेश याद दिलाता है कि वे लेनदारों की सूची में अपने दावे की स्थिति पर नजर रखें, प्रक्रिया के दौरान ही NCLT में विवाद उठाएं और IBC में तय समय के भीतर अपील करें। NCLAT के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की जा सकती है।

स्रोत: NCLAT order

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।