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NCLAT ने एडेल लैंडमार्क्स दिवाला मामले में आदेश वापस लेने की ED की अर्ज़ी खारिज की

NCLAT ने एडेल लैंडमार्क्स की समाधान योजना को फिर से विचार के लिए भेजने वाले अपने अप्रैल के आदेश को वापस लेने की प्रवर्तन निदेशालय की अर्ज़ी खारिज कर दी और कहा कि ED को अपील करनी चाहिए थी।

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आधिकारिक स्रोतNational Company Law Appellate Tribunal
कानूनी / 5 नवंबर 2026

राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) ने 2 नवंबर 2026 को एडेल लैंडमार्क्स लिमिटेड के दिवाला मामले में अपने 16 अप्रैल 2026 के आदेश को वापस लेने की प्रवर्तन निदेशालय (ED) की अर्ज़ी खारिज कर दी। उस आदेश ने कंपनी के लिए आर्ट कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड की समाधान योजना को फिर से विचार के लिए भेजा था, जिसे राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) ने 19 मई 2026 को मंज़ूरी दी।

क्या हुआ

आदेश के अनुसार, एडेल लैंडमार्क्स को 5 दिसंबर 2018 को कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया में लिया गया था, और लेनदारों की समिति ने 15 सितंबर 2022 को योजना मंज़ूर की थी। 9 जनवरी 2026 को, जब योजना मंज़ूरी का इंतज़ार कर रही थी, ED ने कंपनी की कुछ संपत्तियों पर अस्थायी कुर्की का आदेश जारी किया। इसके बाद NCLT ने 27 फ़रवरी 2026 को, आंशिक रूप से इसी कुर्की के कारण, योजना लेनदारों को वापस भेज दी। NCLAT ने 16 अप्रैल 2026 को यह आदेश रद्द कर दिया और दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता की धारा 32A का उल्लेख किया, जो योजना मंज़ूर होने और नियंत्रण बदलने के बाद कंपनी और उसकी संपत्तियों को दिवाला से पहले के अपराधों पर कार्रवाई से बचाती है।

ED की दलील थी कि अप्रैल के आदेश से पहले उसकी सुनवाई नहीं हुई और कुर्क संपत्तियां योजना का हिस्सा नहीं हो सकती थीं। NCLAT ने माना कि ED को 16 मई 2026 तक आदेश की जानकारी थी, फिर भी उसने सुप्रीम कोर्ट में अपील नहीं की, न ही योजना की मंज़ूरी को चुनौती दी, और वापसी की अर्ज़ी 20 जुलाई 2026 को ही दाखिल की। उसने कहा कि अप्रैल के आदेश ने ED की कुर्की पर न रोक लगाई, न उसे रद्द किया, न ED के खिलाफ़ कोई निर्देश दिया, और ED गुण-दोष पर पुनर्विचार चाह रहा था, जो वापसी की अर्ज़ी से संभव नहीं है।

इसका क्या मतलब है

मंज़ूर योजना, जिसके बारे में प्रतिवादियों ने न्यायाधिकरण को बताया कि उस पर अमल चल रहा है, कायम रहेगी। NCLAT ने कहा कि मंज़ूर हो चुकी और समय पर चुनौती न दी गई योजना सरकारी प्राधिकरणों समेत सभी पक्षों पर बाध्यकारी होती है। ED की अस्थायी कुर्की आरोप के स्तर का कदम है, जिसकी पुष्टि PMLA के तहत न्यायनिर्णायक प्राधिकरण को करनी होती है। ये आरोप हैं, दोष के निष्कर्ष नहीं; आरोपी अदालत में दोषी साबित होने तक निर्दोष माने जाते हैं, और कानूनी प्रक्रिया जारी है। इस आदेश के खिलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपील की जा सकती है।

स्रोत: NCLAT order

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।