कानूनी
NCDRC ने जीरकपुर के बिल्डर को कम जमीन के लिए निवासियों को 10 लाख रुपये देने का आदेश दिया
राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने G.S. Promoters & Developers को विज्ञापित जमीन में 0.19 एकड़ की कमी के लिए Panchkula Heights की निवासी सोसाइटी को 10 लाख रुपये देने का आदेश दिया।
राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने 27 अक्टूबर 2026 को बिल्डर G.S. Promoters & Developers को पंजाब के जीरकपुर स्थित उसके Panchkula Heights प्रोजेक्ट की निवासी सोसाइटी को 10 लाख रुपये देने का आदेश दिया, क्योंकि प्रोजेक्ट की जमीन ब्रोशर में विज्ञापित जमीन से कम निकली। आयोग ने सोसाइटी के बड़े दावे खारिज कर दिए, जिनमें कथित रूप से गायब जमीन के लिए 5 करोड़ रुपये का दावा भी शामिल था।
क्या हुआ
सोसाइटी का कहना था कि ब्रोशर में 5 एकड़ के प्रोजेक्ट का वादा था, जबकि स्वीकृत नक्शे में 4 एकड़ दिखाया गया। उसने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) टावर के कंप्लीशन सर्टिफिकेट, जिम, स्विमिंग पूल और कम्युनिटी हॉल वाले प्रशासनिक ब्लॉक, स्वीकृत बिजली लोड और जमीन के मालिकाना हक के हस्तांतरण को लेकर भी शिकायत की।
बिल्डर का तर्क था कि पंजाब में जमीन मापने की स्थानीय इकाइयां अलग-अलग हैं और साइट 4.81 एकड़ की है। पंजाब सरकार से रिपोर्ट मंगाने के बाद आयोग ने पाया कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों में एकड़ के अलग-अलग माप चलते हैं, और माना कि प्रोजेक्ट का क्षेत्रफल 4.81 एकड़ है, 4 एकड़ नहीं। चूंकि बिल्डर ने 0.19 एकड़ की कमी मानी, आयोग ने कहा कि ब्रोशर छापते समय उसे जमीन का सही क्षेत्रफल पता होना चाहिए था, और 10 लाख रुपये का सांकेतिक मुआवजा तथा 25,000 रुपये मुकदमे का खर्च दिलाया।
आयोग ने पाया कि सोसाइटी बाकी शिकायतें साबित नहीं कर सकी। जमीन के मालिकाना हक पर आयोग ने कहा कि Punjab Apartments Ownership Act पहले से ही फ्लैट मालिकों को साझा क्षेत्रों का संयुक्त मालिक बनाता है, और स्पष्ट किया कि साझा क्षेत्र सोसाइटी को सौंपे जाने के बाद उन पर बिल्डर का कोई अधिकार नहीं रहेगा।
इसका क्या मतलब है
यह आदेश दिखाता है कि बिल्डर को ब्रोशर में छपे जमीन के क्षेत्रफल के लिए जवाबदेह ठहराया जा सकता है, हालांकि छोटे अंतर पर मुआवजा भी सीमित हो सकता है। 10 लाख रुपये का इस्तेमाल सदस्यों के सामान्य कल्याण या साझा सुविधाओं के लिए करना होगा। बिल्डर को 45 दिनों में भुगतान करना होगा, ऐसा न करने पर भुगतान तक 9% सालाना साधारण ब्याज लगेगा। यह आदेश आयोग का निष्कर्ष है और इसके खिलाफ अपील की जा सकती है। ऐसी शिकायतों वाले होमबायर्स राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915) या e-Daakhil का सहारा ले सकते हैं।
स्रोत: Consumer commission order
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