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NCDRC ने श्रीराम जनरल इंश्योरेंस को तीन गुम ट्रकों का पूरा बीमा मूल्य चुकाने का आदेश बरकरार रखा

राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कहा कि श्रीराम जनरल इंश्योरेंस ने किराये पर दिए गए तीन ट्रकों के गुम होने पर दावे गलत तरीके से खारिज किए, और पूरा मूल्य चुकाने के आदेश बरकरार रखे।

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आधिकारिक स्रोतConsumer commission
A handwritten insurance note from 1857 on aged paper

फ़ोटो: Wikimedia Commons, public domain (क्रॉप की गई)। सांकेतिक तस्वीर।

राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने 6 नवंबर 2026 को श्रीराम जनरल इंश्योरेंस की तीन पुनरीक्षण याचिकाएं खारिज कर दीं और तीन व्यावसायिक ट्रकों का पूरा बीमित मूल्य चुकाने के आदेश बरकरार रखे। 2019 में ट्रक किराये पर दिए जाने के बाद गुम हो गए थे, जिसके बाद बीमा कंपनी ने मालिकों के दावे खारिज कर दिए थे।

क्या हुआ

आदेश के अनुसार, छत्तीसगढ़ के कबीरधाम के दो वाहन मालिकों ने मई 2019 में अपने बीमित ट्रक किराये पर दिए। किराये पर लेने वाले व्यक्ति ने भुगतान नहीं किया और वाहन ले गया; आदेश में दर्ज पुलिस जांच के अनुसार, वाहन तीसरे पक्षों को बेच दिए गए या नष्ट कर दिए गए। 29 मई 2019 को FIR दर्ज हुई और पुलिस ने किराये पर लेने वाले व्यक्ति और छह सह-आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। ये आरोप हैं, दोष के निष्कर्ष नहीं; अदालत में दोष सिद्ध होने तक आरोपी निर्दोष माने जाते हैं, और कानूनी प्रक्रिया जारी है।

बीमा कंपनी ने 18 अक्टूबर 2019 को यह कहते हुए दावे खारिज कर दिए कि आपराधिक विश्वासघात और धोखाधड़ी पॉलिसी में शामिल नहीं हैं और उसे 52 या 53 दिन देर से सूचना दी गई। छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने 1,500 रुपये की कटौती के बाद पूरा बीमित घोषित मूल्य (IDV, यानी पॉलिसी में तय वाहन का मूल्य) देने का आदेश दिया था: 25,32,148 रुपये, 10,18,346 रुपये और 25,12,900 रुपये, साथ में 18 अक्टूबर 2019 से 6% सालाना ब्याज, और हर मामले में 25,000 रुपये मुआवजा और 3,000 रुपये मुकदमा खर्च।

NCDRC ने कहा कि यह नुकसान चोरी और "दुर्भावनापूर्ण कृत्य" के दायरे में आता है, जो दोनों पॉलिसी में शामिल हैं, और जब पुलिस को तुरंत सूचना दी गई हो तो सिर्फ बीमा कंपनी को देर से बताने के आधार पर दावा खारिज नहीं किया जा सकता। आयोग ने यह भी कहा कि बीमा कंपनी अस्वीकृति पत्र में न लिखे गए आधारों का सहारा नहीं ले सकती, और राज्य आयोग के आदेशों में कोई त्रुटि नहीं पाई।

इसका क्या मतलब है

बीमित वाहन मालिकों के लिए यह आदेश स्पष्ट करता है कि जिस व्यक्ति को वाहन सौंपा गया हो, वह बेईमानी से उसे ले जाए तो चोरी कवर करने वाली पॉलिसी में इसे चोरी माना जा सकता है, और पुलिस को तुरंत सूचना देना बीमा कंपनी को सूचना देने की तारीख से ज्यादा अहम है। इस आदेश के खिलाफ अपील की जा सकती है। जिन पॉलिसीधारकों का दावा खारिज हुआ है, वे राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915) या e-Daakhil के जरिए उपभोक्ता शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

स्रोत: Consumer commission order

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।