कानूनी
NCDRC ने चेक रिवर्सल मामले में पंजाब नेशनल बैंक पर 2 लाख रुपये का हर्जाना रद्द किया
राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कहा कि पंजाब नेशनल बैंक ने 12.6 लाख रुपये का क्लियर हो चुका क्रेडिट प्राप्तकर्ता के खाते में लौटाकर सेवा में कोई कमी नहीं की।

फ़ोटो: Steven Bornholtz / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0 (क्रॉप की गई)। सांकेतिक तस्वीर।
राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने 6 नवंबर 2026 को पंजाब नेशनल बैंक की अपील स्वीकार कर ली और दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का वह आदेश रद्द कर दिया, जिसमें एक ग्राहक को 2 लाख रुपये मुआवजा दिया गया था। आयोग ने कहा कि 12.6 लाख रुपये का क्लियर हो चुका क्रेडिट प्राप्तकर्ता के खाते में लौटाकर बैंक ने सेवा में कोई कमी नहीं की।
क्या हुआ
आदेश के अनुसार, 25 जून 2003 को बैंक की दिल्ली की प्रीत विहार शाखा की एक बचत खाताधारक ने 8,50,000 रुपये और 4,10,000 रुपये के दो चेक अपने पति के नाम जमा किए, जो उस समय बैंक में शाखा प्रबंधक थे। उनका कहना था कि उन्होंने एक घंटे के भीतर शाखा से ट्रांसफर रद्द करने को कहा। शाखा ने उसी दिन क्रेडिट पलट दिया, लेकिन 27 जून 2003 को यह कहते हुए राशि फिर प्राप्तकर्ता के खाते में डाल दी कि पूरा हो चुका क्रेडिट प्राप्तकर्ता की लिखित अनुमति के बिना नहीं पलटा जा सकता।
बैंक ने आयोग को बताया कि उसने 26 जून 2003 को प्राप्तकर्ता को निलंबित किया और विभागीय कार्यवाही में उनका खाता फ्रीज कर दिया, और आदेश में दर्ज है कि CBI ने उनके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। ये आरोप हैं, दोष के निष्कर्ष नहीं; अदालत में दोष सिद्ध होने तक आरोपी निर्दोष माने जाते हैं, और कानूनी प्रक्रिया जारी है।
8 नवंबर 2005 को दिल्ली हाईकोर्ट ने ग्राहक की सहमति से बैंक को 12.6 लाख रुपये ब्याज सहित प्राप्तकर्ता को जारी करने का निर्देश दिया। 2018 में राज्य आयोग ने सेवा में कमी मानते हुए 2 लाख रुपये और चूक पर 18% ब्याज का आदेश दिया था।
NCDRC ने कहा कि चेक का भुगतान होकर रकम खाते में जमा हो जाने के बाद वह पैसा प्राप्तकर्ता का हो जाता है, और बैंक उसकी वैध लिखित अनुमति के बिना उसे डेबिट नहीं कर सकता। आयोग ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश से निपट चुके लेनदेन को ग्राहक फिर से नहीं उठा सकतीं। आयोग ने शिकायत खारिज कर दी और बैंक द्वारा जमा किए गए 1 लाख रुपये ब्याज सहित बैंक को लौटाने का आदेश दिया।
इसका क्या मतलब है
बैंक ग्राहकों के लिए यह आदेश याद दिलाता है कि प्राप्तकर्ता के खाते में क्लियर हो चुका चेक लिखने वाला व्यक्ति यूं ही वापस नहीं ले सकता। भुगतान रोकना हो तो चेक प्रोसेस होने से पहले रोकें। इस आदेश के खिलाफ अपील की जा सकती है। बैंक की सेवा से जुड़ी शिकायतें https://cms.rbi.org.in पर दर्ज की जा सकती हैं।
स्रोत: Consumer commission order
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