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MP हाईकोर्ट ने सागर के हेड कांस्टेबल रघुवीर पांडे की रिश्वत मामले में बरी होने को बरकरार रखा

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 8,000 रुपये के रिश्वत मामले में एक हेड कांस्टेबल के बरी होने के खिलाफ अपील की अनुमति देने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन रिश्वत की मांग साबित नहीं कर सका।

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आधिकारिक स्रोतMadhya Pradesh High Court
A fountain pen resting on a printed contract

फ़ोटो: Blogtrepreneur / Wikimedia Commons, CC BY 2.0 (क्रॉप की गई)। सांकेतिक तस्वीर।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर ने 29 अक्टूबर 2026 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत एक रिश्वत मामले में रघुवीर पांडे, हेड कांस्टेबल, पुलिस चौकी सेहोरा, थाना राहतगढ़, जिला सागर, के बरी होने के खिलाफ राज्य को अपील की अनुमति देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन 8,000 रुपये की रिश्वत की कथित मांग साबित नहीं कर सका, इसलिए उनका बरी होना कायम रहेगा।

क्या हुआ

फैसले के अनुसार, फरवरी 2014 में सागर में लोकायुक्त के विशेष पुलिस स्थापना को दी गई शिकायत में आरोप था कि एक कुएं पर हुए हादसे के बाद जब्त मशीन छोड़ने और शिकायतकर्ता को अभियोजन से बचाने के लिए हेड कांस्टेबल ने 8,000 रुपये मांगे। ट्रैप की योजना बनी, लेकिन फैसले के अनुसार यह चार बार विफल रहा और बंद कर दिया गया। अभियोजन ने इसके बजाय एक रिकॉर्ड की गई बातचीत और फॉरेंसिक आवाज रिपोर्ट पर भरोसा किया।

विशेष न्यायाधीश, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, सागर ने 30 नवंबर 2018 को उन्हें धारा 7 और धारा 13(2) के साथ पठित धारा 13(1)(d) के आरोपों से बरी कर दिया था। इसके बाद लोकायुक्त के विशेष पुलिस स्थापना ने अपील की अनुमति मांगी।

हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रैप विफल रहने से रिश्वत लेना या प्राप्त करना साबित नहीं हुआ। कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता ने अभियोजन का साथ नहीं दिया और रिकॉर्डिंग में अपनी आवाज होने से इनकार किया, आवाजों से परिचित किसी व्यक्ति ने उन्हें नहीं पहचाना, और हर चरण में मौजूद रहे एक व्यक्ति से गवाही नहीं ली गई। कोर्ट ने कहा कि फॉरेंसिक रिपोर्ट केवल यह बताती है कि आवाज संभवतः आरोपी की है और यह ठोस सबूत नहीं है, इसलिए अभियोजन यह साबित नहीं कर सका कि बातचीत शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच हुई। कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को संभव और विश्वसनीय दृष्टिकोण माना और आवेदन खारिज कर दिया।

कोर्ट के आदेश से बरी होने का फैसला कायम है और निर्दोषता की धारणा बनी रहती है।

इसका क्या मतलब है

रिश्वत के मामले में अभियोजन को रिश्वत की मांग साबित करनी होती है। यह फैसला दिखाता है कि जिस रिकॉर्डिंग की आवाजें भरोसेमंद तरीके से पहचानी न गई हों, वह इसे साबित करने के लिए काफी नहीं हो सकती।

अगर कोई अधिकारी आपसे रिश्वत मांगे, तो आप अपने राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो या लोकायुक्त से शिकायत कर सकते हैं; हर राज्य की हेल्पलाइन Oquilia की गाइड https://www.oquilia.com/report-a-bribe पर है।

स्रोत: High Court judgment

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।