कानूनी
MP हाईकोर्ट का SBI को आदेश: खाता खोलें, केवल विवादित रकम FD में रखें
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 27 अक्टूबर 2026 को State Bank of India को एक ग्राहक का खाता अनफ्रीज करने और केवल विवादित रकम फिक्स्ड डिपॉजिट में रखने का निर्देश दिया।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने 27 अक्टूबर 2026 को State Bank of India को निर्देश दिया कि वह एक ग्राहक का खाता अनफ्रीज करे और केवल विवादित रकम फिक्स्ड डिपॉजिट में रखे। अदालत ने वे दिशानिर्देश लागू किए जो इसी हाईकोर्ट की एक अन्य पीठ ने 27 जुलाई 2026 को साइबर अपराध के मामलों में होल्ड किए गए बैंक खातों के लिए गृह मंत्रालय की 10 अप्रैल 2026 की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के आधार पर तय किए थे।
क्या हुआ
खाताधारक ने अदालत से खाते पर लगी रोक हटाने की मांग की थी। अदालत ने कहा कि ऐसे दो मामलों में उसके पहले के फैसले इस मामले पर भी लागू होते हैं। उसने आदेश दिया कि याचिका में बताई गई विवादित रकम फिक्स्ड डिपॉजिट में रखी जाए और खाता अनफ्रीज किया जाए, ताकि ग्राहक उसे चला सके। यह जमा रकम तभी निकाली जा सकेगी जब कोई न्यायिक मजिस्ट्रेट तीन महीने के भीतर आदेश दे, क्योंकि अदालत को उम्मीद है कि पुलिस BNSS या किसी अन्य कानून के तहत कार्रवाई करेगी; ऐसा न होने पर ग्राहक पुलिस को सूचना देकर यह रकम निकाल सकेगा।
अदालत ने जो दिशानिर्देश लागू किए, उनके अनुसार पुलिस को जहां तक संभव हो, केवल संदिग्ध रकम पर लियन या डेबिट फ्रीज (किसी तय रकम पर रोक) लगानी चाहिए, और पूरा खाता केवल असाधारण मामलों में, लिखित कारण दर्ज करके, फ्रीज करना चाहिए। आदेश में बताई गई SOP के अनुसार बैंक ग्राहक की शिकायत सात दिन में सरकारी पोर्टल पर अपलोड करता है, जांच अधिकारी 15 दिन में फैसला करता है, जिला शिकायत निवारण अधिकारी 15 दिन में समीक्षा पर फैसला करता है, और बैंक रिहाई का निर्देश सामान्यतः 48 घंटे में लागू करता है।
इसका क्या मतलब है
अगर साइबर धोखाधड़ी की शिकायत के बाद आपका खाता फ्रीज होता है, तो दिशानिर्देशों के अनुसार बैंक ही आपका पहला संपर्क है और उसे आपको सीधे पुलिस के पास भेजने के बजाय शिकायत की प्रक्रिया बतानी होगी। अपनी रकम का स्रोत दिखाने वाले दस्तावेज तैयार रखें। अगर कोई शिकायत 90 दिन तक हल नहीं होती और रोक जारी रखने का कोई वैध निर्देश नहीं आता, तो बैंक पुलिस को 15 दिन का नोटिस देकर आपके अनुरोध पर रोक हटा सकता है। अदालत ने कहा कि रिट याचिका सामान्यतः इन 90 दिनों के बाद ही सुनी जाएगी, असाधारण मामलों को छोड़कर। साइबर धोखाधड़ी की शिकायत https://cybercrime.gov.in पर या हेल्पलाइन 1930 पर करें।
स्रोत: High Court judgment
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