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MP हाई कोर्ट ने ASI संजय सिसोदिया के खिलाफ रिश्वत का मामला रद्द करने से इनकार किया

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक पुलिस ASI के खिलाफ रिश्वत का मामला रद्द करने से इनकार किया और नए वॉयस सैंपल के साथ आगे की जांच के आदेश को बरकरार रखा।

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आधिकारिक स्रोतMadhya Pradesh High Court
कानूनी / 1 नवंबर 2026

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 23 अक्टूबर 2026 को मध्य प्रदेश पुलिस के सहायक उप-निरीक्षक (ASI) संजय सिसोदिया के खिलाफ रिश्वत का मामला रद्द करने से इनकार कर दिया और नए वॉयस सैंपल के साथ आगे की जांच के विशेष अदालत के आदेश को बरकरार रखा। खंडपीठ ने कहा कि रिकॉर्ड की गई बातचीत की ट्रांसक्रिप्ट से प्रथम दृष्टया प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धारा 7 के तहत अपराध बनता है।

क्या हुआ

फैसले के अनुसार, ASI ने एक होटल संचालक द्वारा अपने मकान मालिक के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी के मामले की जांच की थी। होटल संचालक ने आरोप लगाया कि ASI ने उस जांच के बदले 30,000 रुपये रिश्वत मांगी, और दूसरी शिकायत में कहा कि उन्होंने 10,000 रुपये लेकर आने को कहा। बातचीत रिकॉर्ड की गई और धारा 7 के तहत FIR नंबर 82/2024 दर्ज हुई। दो-तीन बार ट्रैप की कोशिश हुई, लेकिन ASI थाने में नहीं मिले, इसलिए ट्रैप पूरा नहीं हो सका।

जांच एजेंसी ने 12 मार्च 2026 को क्लोजर रिपोर्ट नंबर 2/2025 दाखिल की, जिसमें कहा गया कि ट्रांसक्रिप्ट में कोई मांग नहीं दिखती और भोपाल की राज्य फॉरेंसिक लैब ने उपयुक्त आवाज न होने से कोई राय नहीं दी। 22 जुलाई 2026 को स्पेशल जज (PC Act), भोपाल ने क्लोजर रिपोर्ट खारिज कर दी और नए वॉयस सैंपल सहित आगे की जांच का आदेश दिया।

हाई कोर्ट ने उस आदेश में कोई गैरकानूनी बात नहीं पाई। कोर्ट ने कहा कि धारा 7 के तहत रिश्वत लेने की कोशिश भी अपराध है। कोर्ट ने कहा कि लैब ने सैंपल को अनुपयुक्त और अपर्याप्त पाया था और दर्ज किया था कि आवाज में बड़े अंतर से उसे छिपाने की कोशिश का संकेत मिलता है, इसलिए उस पर आधारित क्लोजर निर्णायक नहीं था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर कोर्ट ने कहा कि अदालत आरोपी को वॉयस सैंपल देने का निर्देश दे सकती है। याचिका खारिज कर दी गई।

इसका क्या मतलब है

जांच जारी रहेगी और पुलिस को दोबारा जांच के लिए नए वॉयस सैंपल लेने होंगे। हाई कोर्ट की प्रथम दृष्टया राय दोष का निष्कर्ष नहीं है। ये आरोप हैं, दोष के निष्कर्ष नहीं; आरोपी को अदालत में दोषी साबित होने तक निर्दोष माना जाता है, और कानूनी प्रक्रिया जारी है।

किसी अधिकारी द्वारा रिश्वत मांगे जाने पर राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो या लोकायुक्त में शिकायत की जा सकती है; हर राज्य की हेल्पलाइन Oquilia की गाइड https://www.oquilia.com/report-a-bribe पर उपलब्ध है।

स्रोत: High Court judgment

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।