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MP हाईकोर्ट: साइबर शिकायत पर फ्रीज बैंक ऑफ महाराष्ट्र खाता खोला जाए

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र को साइबर अपराध शिकायत पर फ्रीज किया गया एक ग्राहक का खाता खोलने का निर्देश दिया। केवल विवादित 5,710 रुपये फिक्स्ड डिपॉजिट में रखे जाएंगे।

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आधिकारिक स्रोतMadhya Pradesh High Court
कानूनी / 27 अक्टूबर 2026

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र को एक ग्राहक का वह खाता खोलने का निर्देश दिया है, जिसे साइबर अपराध की शिकायत पर फ्रीज कर दिया गया था। 16 अक्टूबर 2026 के आदेश में कोर्ट ने कहा कि केवल विवादित 5,710 रुपये फिक्स्ड डिपॉजिट में अलग रखे जाएं।

क्या हुआ

खाताधारक ने बैंक की इंदौर पलासिया शाखा में अपने खाते पर लगी रोक हटाने और सामान्य निकासी व ट्रांसफर की अनुमति देने की मांग की थी। कोर्ट ने इसी हाईकोर्ट के दो पुराने फैसले लागू किए। पहले फैसले में बैंकों को निर्देश दिया गया था कि साइबर अपराध एजेंसियों द्वारा बताई गई विवादित रकम ही फिक्स्ड डिपॉजिट में रखी जाए, और अगर पुलिस तीन महीने में मजिस्ट्रेट का आदेश नहीं लाती तो वह रकम जारी कर दी जाए।

27 जुलाई 2026 को जबलपुर में दिए गए दूसरे फैसले में कोर्ट ने गृह मंत्रालय की 10 अप्रैल 2026 की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत दिशानिर्देश बनाए थे। यह SOP राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग प्रणाली के जरिए रोके गए खातों के लिए है। इन दिशानिर्देशों के अनुसार, पुलिस को जहां तक संभव हो केवल विवादित रकम पर रोक लगानी चाहिए और पूरा खाता केवल असाधारण मामलों में लिखित कारणों के साथ फ्रीज करना चाहिए। ग्राहक के लिए बैंक पहला संपर्क बिंदु है; बैंक को सात दिन में शिकायत पोर्टल पर अपलोड करनी होगी, जांच अधिकारी को पंद्रह दिन में फैसला करना होगा, और बैंक को रिलीज का निर्देश संभव हो तो 48 घंटे में लागू करना होगा।

इन्हीं के आधार पर कोर्ट ने आदेश दिया कि 5,710 रुपये फिक्स्ड डिपॉजिट में रखे जाएं और तीन महीने में मजिस्ट्रेट का आदेश आने पर ही उनका निपटारा हो; ऐसा न होने पर ग्राहक पुलिस को सूचना देकर यह रकम निकाल सकता है। खाता खुद फ्रीज से मुक्त किया जाएगा।

इसका क्या मतलब है

अगर साइबर अपराध की शिकायत के कारण आपका खाता फ्रीज हुआ है, तो कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार आपके बैंक को शिकायत प्रक्रिया समझानी चाहिए और आपकी शिकायत दर्ज करनी चाहिए, न कि सिर्फ आपको पुलिस के पास भेज देना चाहिए। जहां पर्याप्त हो, पुलिस से केवल संदिग्ध रकम पर रोक की अपेक्षा है। कोर्ट ने कहा कि खाते के बारे में कोई और शिकायत आने पर बैंक SOP के अनुसार कार्रवाई कर सकता है।

स्रोत: High Court judgment

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।