कानूनी
MP हाईकोर्ट ने अमीन हेतराम कोल की रिश्वत मामले में बरी होने के खिलाफ लोकायुक्त की अपील स्वीकार की
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 2,000 रुपये के रिश्वत ट्रैप मामले में सिंचाई विभाग के एक अमीन के बरी होने के खिलाफ लोकायुक्त को अपील की अनुमति दी है।
मध्य प्रदेश के सिंचाई विभाग के अमीन हेतराम कोल, जिन्हें नवंबर 2025 में एक रिश्वत ट्रैप मामले में बरी किया गया था, अब उस फैसले के खिलाफ अपील का सामना करेंगे। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने 23 अक्टूबर 2026 को विशेष पुलिस स्थापना, लोकायुक्त को अपील की अनुमति दी। अदालत ने अपील को अंतिम सुनवाई के लिए स्वीकार किया और कहा कि वह बरी किए जाने के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय नहीं दे रही है।
क्या हुआ
फैसले के अनुसार, एक शिकायतकर्ता ने जुलाई 2019 में लोकायुक्त से शिकायत की थी कि अमीन एक बांध के जलग्रहण क्षेत्र की जमीन के पट्टे में मदद के लिए 2,000 रुपये मांग रहे हैं। लोकायुक्त का आरोप है कि उन्होंने फिनॉलफ्थेलिन लगे 500 रुपये के चार नोट लिए। यह रसायन ट्रैप के पैसे पर निशान लगाने के लिए इस्तेमाल होता है। लोकायुक्त के अनुसार, नोट उनकी कमीज की जेब से बरामद हुए और फिर उन्हें गिरफ्तार किया गया।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विशेष अदालत ने 29 नवंबर 2025 को उन्हें धारा 7 और 13(1)(d) सहपठित 13(2) के आरोपों से बरी कर दिया था। फैसले के अनुसार, निचली अदालत ने उनका यह बचाव माना कि यह रकम शिकायतकर्ता पर बकाया 2,000 रुपये का जुर्माना थी। हाईकोर्ट में उनके वकील ने दलील दी कि एक शिकायतकर्ता ने रिश्वत की मांग से इनकार किया था और कमीज को रासायनिक जांच के लिए नहीं भेजा गया था।
हाईकोर्ट ने माना कि नोटों की बरामदगी, रिकॉर्ड की गई बातचीत और शिकायतकर्ता की पहले की गवाही से बहस योग्य मामला बनता है। अदालत ने कहा कि सरकारी जुर्माना आम तौर पर तय दफ्तर में आधिकारिक रसीद के साथ जमा होता है, इसलिए इस बचाव की जांच जरूरी है। अपील दिसंबर 2026 में अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।
ये आरोप हैं, दोष के निष्कर्ष नहीं; अदालत में दोष सिद्ध होने तक आरोपी को निर्दोष माना जाता है, और कानूनी प्रक्रिया जारी है। अंतिम सुनवाई के बाद हाईकोर्ट जब तक इसे पलटता नहीं, बरी करने का फैसला कायम है।
इसका क्या मतलब है
यह आदेश दिखाता है कि भ्रष्टाचार के ट्रैप मामले में बरी होने का फैसला भी अपील में दोबारा जांचा जा सकता है, जब हाईकोर्ट को बहस योग्य मामला दिखे, भले ही शिकायतकर्ता ने मुकदमे में अलग-अलग बयान दिए हों। अपील की अनुमति केवल मामले पर बहस की इजाजत है; यह आरोपी के खिलाफ कोई निष्कर्ष नहीं है।
अगर कोई अधिकारी रिश्वत मांगे, तो नागरिक अपने राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो या लोकायुक्त से शिकायत कर सकते हैं। हर राज्य की हेल्पलाइन की सूची Oquilia की गाइड में है: https://www.oquilia.com/report-a-bribe
स्रोत: High Court judgment
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