कानूनी
मद्रास हाई कोर्ट ने रिश्वत ट्रैप केस में फायर अधिकारी एम. बालसुब्रमण्यम की बर्खास्तगी बरकरार रखी
मद्रास हाई कोर्ट ने कोयंबटूर के एक फायर सर्विस जिला अधिकारी की बर्खास्तगी बरकरार रखी। कोर्ट ने कहा कि विभागीय जांच में उन पर भ्रष्टाचार का आरोप साबित हुआ।

फ़ोटो: Suresh Babunair / Wikimedia Commons, CC BY 3.0 (क्रॉप की गई)। फ़ाइल फ़ोटो।
मद्रास हाई कोर्ट ने 30 अक्टूबर 2026 को कोयंबटूर में फायर एंड रेस्क्यू सर्विसेज विभाग के जिला अधिकारी एम. बालसुब्रमण्यम की सेवा से बर्खास्तगी को बरकरार रखा। उन्हें 2019 में एक रिश्वत ट्रैप मामले में न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। कोर्ट ने कहा कि विभागीय जांच में उन पर भ्रष्टाचार का आरोप साबित हुआ और बर्खास्तगी से कम कोई भी सजा अपर्याप्त होती।
क्या हुआ
फैसले के अनुसार, 8 नवंबर 2019 को ट्रैप के बाद प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत दर्ज मामले में उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया और फिर निलंबित किया गया। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने विभाग को चार महीने के भीतर अनुशासनात्मक कार्यवाही पूरी करने का निर्देश दिया। 7 मार्च 2022 को आरोप पत्र जारी हुआ और तमिलनाडु के गृह (पुलिस) विभाग ने 31 जुलाई 2023 के आदेश से उन्हें बर्खास्त कर दिया।
अपनी रिट याचिका में उन्होंने कहा कि तमिलनाडु लोक सेवा आयोग की राय उन्हें नहीं दी गई, जांच अधिकारी ने अभियोजक की तरह काम किया, गवाहों से उनकी गैरमौजूदगी में और पुलिस जांच अधिकारी की मौजूदगी में पूछताछ हुई, और उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं था।
कोर्ट ने हर दलील खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि आयोग से परामर्श अनिवार्य नहीं था और विभाग आयोग की सहमति से पहले ही बर्खास्तगी का फैसला कर चुका था। जिन गवाहों से पहले उनकी गैरमौजूदगी में पूछताछ हुई थी, उनसे उनकी मौजूदगी में दोबारा पूछताछ हुई और उन्होंने जिरह की। कथित तौर पर रिश्वत देने वाले शिकायतकर्ता और ट्रैप के गवाहों से पूछताछ हुई, और कोर्ट ने माना कि ये सबूत निष्कर्षों के लिए पर्याप्त हैं। पुलिस के पास मौजूद वीडियो फुटेज पर विभाग ने भरोसा नहीं किया था। याचिका बिना खर्च के खारिज कर दी गई।
इसका क्या मतलब है
बर्खास्तगी कायम रहेगी। कोर्ट ने कहा कि विभागीय जांच का फैसला संभावनाओं की अधिकता के आधार पर होता है, जो आपराधिक मुकदमे से कम सख्त मानक है।
यह फैसला केवल विभागीय मामले से जुड़ा है और इसमें आपराधिक मामले का नतीजा दर्ज नहीं है। उस मामले में ये आरोप हैं, दोष के निष्कर्ष नहीं; आरोपी को अदालत में दोषी साबित होने तक निर्दोष माना जाता है, और कानूनी प्रक्रिया जारी है।
किसी अधिकारी द्वारा रिश्वत मांगे जाने पर राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में शिकायत की जा सकती है; हर राज्य की हेल्पलाइन Oquilia की गाइड https://www.oquilia.com/report-a-bribe पर उपलब्ध है।
स्रोत: High Court judgment
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