कानूनी
मद्रास हाई कोर्ट ने यूनियन बैंक के खिलाफ नीलामी खरीदार का 4.14 करोड़ रुपये ब्याज दावा खारिज किया
मद्रास हाई कोर्ट ने कब्जे में 26 महीने की देरी पर यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से 15% ब्याज मांगने वाली नीलामी खरीदार की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि बिक्री 'जैसी है जहां है' आधार पर थी।
मद्रास हाई कोर्ट ने 27 अक्टूबर 2026 को Elakayem Auto Ancillaries (P) Ltd की वह रिट याचिका खारिज कर दी, जिसमें बैंक नीलामी में खरीदी गई संपत्ति का कब्जा देने में देरी के लिए यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से ब्याज मांगा गया था। कंपनी ने अपने भुगतान पर 15% सालाना की दर से करीब 4.14 करोड़ रुपये का दावा किया था।
क्या हुआ
बैंक यह संपत्ति SARFAESI Act, 2002 के तहत बेच रहा था, जो बैंकों को अदालत गए बिना डिफॉल्ट करने वाले कर्जदार की गिरवी संपत्ति बेचने की अनुमति देता है। कंपनी ने 23 फरवरी 2023 को MSTC Limited के जरिए हुई सार्वजनिक ई-नीलामी करीब 10.22 करोड़ रुपये की बोली से जीती, 6 मार्च 2023 तक पूरी रकम चुका दी, और स्टांप ड्यूटी व रजिस्ट्रेशन पर करीब 1.12 करोड़ रुपये खर्च किए। बिक्री प्रमाणपत्र 13 मार्च 2023 को जारी हुआ।
याचिका के अनुसार कब्जा 31 मई 2025 को मिला, यानी पूरे भुगतान के लगभग 26 महीने बाद। अधिनियम की धारा 14 के तहत मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कृष्णागिरि के सामने बैंक का आवेदन मई 2023 में दायर हुआ, कमियों के कारण लौटाया गया और अप्रैल 2024 में दोबारा पेश हुआ। 16 अगस्त 2024 को मजिस्ट्रेट द्वारा इसे मंजूर करने के बाद किरायेदार होने का दावा करने वाली इकाइयों और एक गारंटर ने डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल में आदेश को चुनौती दी, जिसे खारिज कर दिया गया। बैंक ने सितंबर 2023 में खरीदार को बताया था कि कर्जदार कंपनी दिवाला और परिसमापन प्रक्रिया में भी जा चुकी थी।
कोर्ट ने कहा कि देरी बैंक के नियंत्रण से बाहर की बीच में आई कार्यवाहियों के कारण हुई, और नीलामी की शर्तों में साफ था कि संपत्ति "जैसी है जहां है" आधार पर बेची जा रही है और बैंक के पास केवल प्रतीकात्मक कब्जा है। इसलिए खरीदार जानता था कि बैंक तुरंत कब्जा नहीं देगा। कोर्ट ने बिना किसी लागत के याचिका खारिज कर दी।
इसका क्या मतलब है
बैंक की SARFAESI नीलामी में बोली लगाने वाले हर व्यक्ति को बिक्री नोटिस ध्यान से पढ़ना चाहिए। जब संपत्ति "जैसी है जहां है" आधार पर बिकती है और बैंक के पास केवल प्रतीकात्मक कब्जा होता है, तो इस फैसले के अनुसार खरीदार को भौतिक कब्जे के लिए अदालत और ट्रिब्यूनल की कार्यवाही पूरी होने तक इंतजार करना पड़ सकता है, और चुकाई गई रकम पर ब्याज का दावा नहीं बनता, जब तक देरी बैंक की अपनी गलती से न हो। बैंक की सेवा से जुड़ी शिकायतें RBI के पास https://cms.rbi.org.in पर दर्ज की जा सकती हैं।
स्रोत: High Court judgment
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