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मद्रास हाई कोर्ट: ESIC कार्वी डेटा मैनेजमेंट से दिवाला से पहले का बकाया नहीं वसूल सकता

मद्रास हाई कोर्ट ने कहा कि समाधान योजना मंजूर होने के बाद कार्वी डेटा मैनेजमेंट सर्विसेज पर ESIC की दिवाला-पूर्व अवधि की 33,14,018 रुपये की मांग खत्म हो जाती है।

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आधिकारिक स्रोतMadras High Court
Red domes and towers of the Madras High Court above the treetops

फ़ोटो: Yoga Balaji / Wikimedia Commons, CC BY 3.0 (क्रॉप की गई)। फ़ाइल फ़ोटो।

मद्रास हाई कोर्ट ने 26 अक्टूबर 2026 को कहा कि कार्वी डेटा मैनेजमेंट सर्विसेज पर कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) की, कंपनी की दिवाला प्रक्रिया से पहले की अवधि के लिए 33,14,018 रुपये की मांग वसूल नहीं की जा सकती। कोर्ट ने कहा कि समाधान योजना मंजूर होने के बाद दिवाला से पहले के ऐसे बकाये खत्म हो जाते हैं।

क्या हुआ

कार्वी डेटा मैनेजमेंट सर्विसेज ने ESIC के 2 नवंबर 2025 और 4 नवंबर 2025 के आदेशों और चेन्नई में ESIC के रिकवरी ऑफिसर के 14 जनवरी 2026 के कुर्की आदेश को चुनौती दी थी। इन आदेशों में फरवरी 2011 से सितंबर 2024 तक की वेतन अवधि के लिए ESI अंशदान, ब्याज और हर्जाना मांगा गया था।

फैसले के अनुसार, कंपनी की कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया, यानी कर्ज न चुका पाने वाली कंपनी को उबारने की Insolvency and Bankruptcy Code के तहत प्रक्रिया, 15 सितंबर 2023 को शुरू हुई थी। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने 13 दिसंबर 2024 को समाधान योजना मंजूर की।

कोर्ट ने कहा कि दिवाला प्रक्रिया से पहले की अवधि के लिए ESI अंशदान के 19,50,201 रुपये और ब्याज के 13,63,817 रुपये, कुल 33,14,018 रुपये की मांग टिकाऊ नहीं है और Insolvency and Bankruptcy Code की Section 53 तथा घनश्याम मिश्रा एंड संस बनाम एडलवाइस एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आलोक में खत्म हो जाएगी। कोर्ट ने यही बात हर्जाने और ब्याज की छोटी रकम के दिवाला-पूर्व हिस्से पर भी लागू की, जिसमें ESI Act की Section 85-B के तहत लगाया गया 2,989 रुपये का हर्जाना शामिल है।

दिवाला प्रक्रिया शुरू होने के बाद की अवधि के लिए कोर्ट ने ESIC को निर्देश दिया कि वह कंपनी के खिलाफ कार्रवाई से पहले बकाया रकम तय करे, और कहा कि ऐसी मांग किए जाने पर कंपनी भुगतान करेगी। रिट याचिकाओं का निपटारा बिना किसी खर्च के किया गया।

इसका क्या मतलब है

यह फैसला इस सिद्धांत को लागू करता है कि समाधान योजना मंजूर होने के बाद, दिवाला से पहले की अवधि के वे दावे जो योजना का हिस्सा नहीं हैं, बाद में कंपनी के खिलाफ नहीं चलाए जा सकते। ESIC दिवाला प्रक्रिया शुरू होने के बाद की अवधि के लिए अंशदान, ब्याज और हर्जाना अब भी वसूल सकता है, लेकिन उन्हें तय करने के बाद ही। हाई कोर्ट के इस आदेश को ऊपरी बेंच या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।

स्रोत: High Court judgment

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।