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केरल हाई कोर्ट ने ICICI Bank से खाता चालू करने को कहा, रोक 4,000 रुपये तक सीमित

केरल हाई कोर्ट ने 23 अक्टूबर 2026 को ICICI Bank को निर्देश दिया कि वह एक ग्राहक को उसका फ्रीज खाता चलाने दे और रोक सिर्फ साइबर पुलिस द्वारा मांगे गए 4,000 रुपये तक रखे।

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आधिकारिक स्रोतKerala High Court
कानूनी / 29 अक्टूबर 2026

केरल हाई कोर्ट ने 23 अक्टूबर 2026 को ICICI Bank को निर्देश दिया कि वह एक ग्राहक को उसका बैंक खाता चलाने दे, जिसे बैंक ने पुलिस के अनुरोध पर फ्रीज कर दिया था। अदालत ने रोक को पुलिस की मांग में लिखी 4,000 रुपये की रकम तक सीमित कर दिया।

क्या हुआ

मलप्पुरम जिले में ICICI Bank की मंजेरी शाखा के खाताधारक ने अपने खाते पर लगाई गई डेबिट रोक यानी लियन के खिलाफ रिट याचिका दायर की। लियन का मतलब है कि बैंक खाते की रकम निकालने पर रोक लगा देता है। उन्होंने अदालत से कहा कि वे पुलिस द्वारा दूसरे लोगों के खिलाफ दर्ज अपराध में आरोपी नहीं हैं और उससे उनका कोई संबंध नहीं है। पुलिस का मामला दूसरे लोगों से जुड़ा है; ये आरोप हैं, दोष का निष्कर्ष नहीं; आरोपियों को अदालत में दोष साबित होने तक निर्दोष माना जाता है, और कानूनी प्रक्रिया जारी है।

बैंक के वकील ने पुष्टि की कि बैंक को महाराष्ट्र के धाराशिव स्थित साइबर पुलिस स्टेशन से खाते में 4,000 रुपये फ्रीज करने की मांग मिली थी, और बैंक ने खाता फ्रीज कर दिया था।

अदालत ने कहा कि यह मुद्दा उसके पहले के फैसलों से तय है। वह लगातार बैंकों को निर्देश देती रही है कि खाताधारकों को खाता चलाने दें और रोक सिर्फ पुलिस की मांग में लिखी रकम तक रखें, बशर्ते बैंक को यह शक न हो कि खाते का इस्तेमाल वित्तीय साइबर अपराध या मनी म्यूल गतिविधि के लिए हो रहा है।

अदालत ने यह भी बताया कि गृह मंत्रालय के इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर ने 2026 के लिए एक SOP बनाई है, जिसमें रकम पर रोक लगाने, उसकी कस्टडी और वापसी, और शिकायत निवारण की प्रक्रिया है। SOP का Clause 10 उन खाताधारकों के लिए समयबद्ध शिकायत व्यवस्था देता है जिनकी रकम रोकी गई है या जिनका खाता निलंबित है।

अदालत ने निर्देश दिया कि 4,000 रुपये का निपटारा इसी SOP के तहत होगा। उसने यह भी कहा कि आगे कोई नई मांग मिलने पर बैंक खाते पर फिर रोक लगा सकता है।

इसका क्या मतलब है

जिन ग्राहकों का खाता किसी और के खिलाफ साइबर धोखाधड़ी की शिकायत के चलते फ्रीज हुआ है, उनके लिए यह फैसला अदालत के तय रुख को दोहराता है: रोक सिर्फ पुलिस द्वारा मांगी गई रकम पर होनी चाहिए, पूरे खाते पर नहीं, जब तक बैंक को दुरुपयोग का शक न हो। खाताधारक रोकी गई रकम के बारे में गृह मंत्रालय की SOP के Clause 10 की व्यवस्था के जरिए शिकायत कर सकते हैं।

स्रोत: High Court judgment

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।