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कर्नाटक हाई कोर्ट ने नीलामी जमा राशि वापसी मुकदमे में सारस्वत बैंक की देर से उठाई दलील खारिज की

कर्नाटक हाई कोर्ट ने 3 नवंबर 2026 को कहा कि सारस्वत को-ऑपरेटिव बैंक, नाकाम बैंक नीलामी में जमा रकम की वापसी के एक बिल्डर के मुकदमे को रोकने के लिए देर से नई दलील नहीं जोड़ सकता।

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आधिकारिक स्रोतKarnataka High Court
Karnataka High Court in Bengaluru at the end of a garden path

फ़ोटो: Vivek Urs / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0 (क्रॉप की गई)। फ़ाइल फ़ोटो।

कर्नाटक हाई कोर्ट ने 3 नवंबर 2026 को सारस्वत को-ऑपरेटिव बैंक की याचिका खारिज कर दी। बैंक, बेंगलुरु की रियल एस्टेट फर्म Royale Builders and Developers के मुकदमे में देर से एक नई दलील जोड़ना चाहता था। फर्म ने वह रकम ब्याज समेत लौटाने की मांग की है, जो उसने तब जमा की थी जब बैंक ने कर्ज वसूली के लिए गिरवी संपत्तियों की नीलामी की थी। कोर्ट ने कहा कि बैंक इस चरण पर नई दलील नहीं उठा सकता।

क्या हुआ

फैसले के अनुसार, बैंक ने कुछ गिरवी संपत्तियों की नीलामी अधिसूचित की और फर्म ने रकम जमा की। बिक्री पूरी नहीं हुई और जमा राशि बैंक के पास ही रही। इसके बाद फर्म ने रकम वापसी के लिए बेंगलुरु की कमर्शियल कोर्ट में मुकदमा दायर किया।

सबूत दर्ज होना शुरू होने के बाद बैंक ने अपने लिखित बयान (मुकदमे में उसका औपचारिक जवाब) में संशोधन की अनुमति मांगी, ताकि यह दलील दी जा सके कि मुकदमा चल ही नहीं सकता। बैंक का कहना था कि Multi-State Co-operative Societies Act, 2002 की Section 115 के तहत ऐसी सोसाइटी पर मुकदमा करने से पहले सेंट्रल रजिस्ट्रार को 90 दिन का नोटिस देना जरूरी है। कमर्शियल कोर्ट ने 14 जुलाई 2026 को यह अर्जी खारिज कर दी थी।

हाई कोर्ट ने उस आदेश को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल शुरू होने के बाद पक्षकार को दिखाना होता है कि पूरी सावधानी के बावजूद वह यह दलील पहले नहीं उठा सकता था, और बैंक ने ऐसा कोई कारण नहीं बताया। कोर्ट ने कहा कि बैंक के रवैये से मुकदमे में देरी हुई और देर से उठाई गई दलील से फर्म को नुकसान होगा, जिसमें समय-सीमा का सवाल भी शामिल है। कोर्ट ने यह भी कहा कि Section 115 तब लागू होती है जब विवाद सोसाइटी के गठन, प्रबंधन या कारोबार से जुड़ा हो, और नीलामी में जमा रकम लौटाने का मामला प्रथम दृष्टया इसके दायरे में नहीं आता। अंतिम फैसला कमर्शियल कोर्ट को करना है।

इसका क्या मतलब है

रकम वापसी का मुकदमा अब कमर्शियल कोर्ट में जारी रहेगा। बैंक नीलामियों में बोली लगाने वालों के लिए यह फैसला दिखाता है कि मल्टी-स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक ऐसे कानूनी नोटिस की दलील पर भरोसा नहीं कर सकता जो उसने शुरुआत में नहीं उठाई, और नीलामी जमा राशि लौटाने के विवाद को प्रथम दृष्टया Section 115 के तहत बैंक का कारोबार नहीं माना गया। बैंक के खिलाफ शिकायत वाले ग्राहक RBI से https://cms.rbi.org.in पर भी संपर्क कर सकते हैं।

स्रोत: High Court judgment

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।